अली बाबा मनमोहन सिंह की मंडली में एक और चोर!
- किस्सा कुर्सी का |
- Super User |
- शुक्रवार, 22 जुलाई 2011 12:39
पहले ए राजा, फिर कनिमोजी। और अब कपड़ा मंत्री दयानिधि मारन भी अचानक लुटेरे के अवतार में। करोड़ों की कमाई के लिए करुणानिधि की कलाबाजियों के मोहरों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि साफ सुथरी छवि का लबादा ओढ़कर मारन भी वह सब पहले से ही कर रहे थे, जो उनकी पार्टी के बाकी लोगों ने किया। इसलिए अब यह अंदाज लगाना गैरजरूरी लगने लगा है कि अगला नाम किसका आएगा।
टीवी चैनलों का दिमागी दिवालियापन
- दिल की कलम से |
- दीपक महान (वृतचित्र निर्देशक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार) |
- बुधवार, 19 अक्टूबर 2011 11:29
आजकल जिस प्रकार से इलेक्ट्निक मीडिया द्वारा समाचारों का प्रसारण किया जा रहा है, उसे देख कर ना केवल टेलीविजन के पुरुधाओं को दुःख होता है बल्कि भविष्य के लिए चिंता भी होने लगी है।
बहुराष्ट्रीय कंपनियों का मकड़जाल
- आपकी बात |
- रवि |
- शुक्रवार, 03 फरवरी 2012 17:44
कल मैंने बहुराष्ट्रीय कंपनियों के एक क्वालिटी प्रोडक्ट के बारे में आपको बताया था आज उसी की अगली कड़ी। और हमेशा की तरह ये लेख भी परम सम्मानीय राजीव दीक्षित भाई के विभिन्न व्याख्यानों में से जोड़ के मैंने बनाया है, उम्मीद है कि आप लोगों के ये पसंद आएगी।
मृणाल सेन से सीखें,मौजूदा व्यवस्था के मुकाबले उठ खड़ा होने के लिए कलेजा भी तो होना चाहिए!
- आपकी बात |
- पलाश विश्वास |
- बुधवार, 16 मई 2012 15:24
हमारे लिए यह कोई खबर नहीं कि अपनी 90 वीं वषर्गांठ मना चुके प्रसिद्ध फिल्म निर्माता मृणाल सेन अभी भी काम में लगे हुए हैं और इस उम्र में भी उनमें एक नयी फिल्म बनाने का जज्बा कायम है।भारतीय सिनेमा में सामाजिक यथार्थ को विशुद्ध सिनेमा और मेलोड्रामा की दोनों अति से बाहर अभिव्यक्ति देने में जो पहल उन्होंने की, वह हमारे लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है।
उमा भारती क्या गुल खिला पाएगी उत्तर प्रदेश में?
- किस्सा कुर्सी का |
- Super User |
- शुक्रवार, 22 जुलाई 2011 12:38
ना-ना करते आखिरकार उमा भारती की घर वापसी हो ही गयी। उमा भारती यानि भारतीय जनता पार्टी का वह चेहरा जिसने राममंदिर आंदोलन में एक आंच पैदा की और बाद के दिनों मध्यप्रदेश में दिग्विजय सिंह की 10 साल से चल रही सरकार को अपने तेवरों से न सिर्फ घेरा, वरन उनको सत्ता से बाहर कर भाजपा को ऐतिहासिक जीत दिलाई। बावजूद इसके उमा भारती अगर भाजपा की देहरी पर एक लंबे समय से प्रतीक्षारत थीं, तो इसके मायने बहुत गंभीर हैं।
ईमानदारों से धोखा
- दिल की कलम से |
- दीपक महान (वृतचित्र निर्देशक व लेखक) |
- बुधवार, 05 अक्टूबर 2011 16:05
सालों से चर्चा है कि अमीर भारतीयों का काला धन स्विस बैंकों में जमा है औरअगर य़े पैसा स्वदेश आ जाये तो उससे भारत की समृद्धी में चार चाँद लग जाएँ।
उत्तर प्रदेश में जारी शह-मात का खेल
- आपकी बात |
- निर्मल रानी |
- सोमवार, 21 नवम्बर 2011 11:18
देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा के आम चुनावों का समय जैसे-जैसे करीब आता जा रहा है राज्य की राजनीति में वैसे-वैसे तेज़ी से उबाल भी आता जा रहा है।
पूर्वोत्तर भारत में अब चर्च के निशाने पर सेना
- आपकी बात |
- जगदम्बा मल्ल |
- बुधवार, 16 मई 2012 14:30
नागालैण्ड, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, असम और अरुणाचल प्रदेश में आतंकवादियों-अलगाववादियों के द्वारा जारी हिंसा के कारण सामान्य जनता का जीना दूभर हो गया है। पूर्वोत्तर भारत में चारोंतरफ हत्या, जबरन धन बसूली, अपहरण, हेरोइन, शराब तथा अन्य मादक पदार्थों सहित हथियारों की तस्करी आदि अपराधोंका बोलबाला है।
संगीत की धड़कनों का जादूगर : प्यारेलाल
- दिल की कलम से |
- दीपक महान (वृतचित्र निर्देशक एवं लेखक) |
- शुक्रवार, 12 अगस्त 2011 17:06
मैंनें विभिन्न स्थानों पर सूर्यास्त देखा है - गहरे समुद्र में, बादलों के ऊपर और पहाड़ों की चोटियों पर - लेकिन शायद ही कभी सुगम संगीत की स्वर लहरियों के संग जैसा मैनें हाल ही में मुंबई के समुद्र तट पर देखा।
मुस्लिम समुदाय ऐसा कबीला है जिसका कोई बिना रहनुमा नहीं
- आपकी बात |
- मो. रफ़ीक चौहान |
- बुधवार, 21 सितम्बर 2011 13:25
देश का मुस्लिम समुदाय एक ऐसा कबीला है। जिसका प्रदेश तो क्या रष्ट्रीय स्तर पर भी कोई रहनुमा नहीं। व्यक्तिगत स्वार्थों को पुरा करने लिए कोई कहां फिसल जाए, इसका भी पता नहीं।
क्षेत्रीय दलों की यह कैसी धर्म निरपेक्षता
- आपकी बात |
- निर्मल रानी |
- बुधवार, 16 मई 2012 14:23
यदि हम भारतीय जनता पार्टी तथा शिवसेना के अतिरिक्त देश के अन्य राजनैतिक दलों की बात करें तो लगभग सभी ने अपने अपने संगठनों को स्वयं ही धर्म निरपेक्ष राजनैतिक दलों की उपाधि दे डाली है। इन दलों द्वारा अपने को धर्मनिरपेक्ष साबित करने के लिए ही समय-समय पर विभिन्न राजनैतिक अखाड़ों में तरह तरह के प्रयोग किए जाते रहे हैं।
चवन्नी गई और लोगों का ईमान भी ले गई...
- दिल की कलम से |
- Super User |
- शुक्रवार, 22 जुलाई 2011 12:42
एक सरकारी फरमान के तहत तीस जून २०११ से चवन्नी के सिक्के का चलन देश भर में बंद हो गया। यानी चवन्नी छाप लोग तो खूब मिलेंगे पर चवन्नी का मिलना अब दूभर हो जायेगा और उसे देखने के लिए भावी पीढ़ियों को संग्रहालयों में जाना पड़ेगा।
विरोधाभासों के 'भँवर' में नरेंद्र मोदी
- आपकी बात |
- तनवीर जाफ़री |
- मंगलवार, 20 सितम्बर 2011 17:07
पिछले दिनों गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने अहमदाबाद में एक तीन दिवसीय 'सद्भावना उपवास' नामक आयोजन कर अपनी उग्र हिंदुत्ववादी छवि को बदलने का प्रयास किया।
महाराष्ट्र में सूखा और फिल्मी दुनिया में सामाजिक सरोकार की धूम!
- आपकी बात |
- मुंबई से एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास |
- सोमवार, 14 मई 2012 16:09
केंद्र और राज्य की सरकारों को बाजार की सेहत की चिंता है। खुद कृषि मंत्री शरद पवार महाराष्य्र से हैं पर उनको क्रिकेट की जितनी चिंता है, उतनी किसानों की नहीं। देशभर में कृषि, देहात और किसान हाशिये पर है और सेनसेक्स अर्थ व्यवस्था में उनके लिए कोई जगह नहीं है।
सच्चा सितारा : राजेंद्र कुमार
- दिल की कलम से |
- Super User |
- शुक्रवार, 22 जुलाई 2011 12:40
यदि आप किसी आधुनिक दर्शक को कहें कि एक समय था जब हिंदी फिल्में कई महीनों तक अपार भीड़ खिंचती थी तो संभव है कि आपको झूठा करार दिया जाये ! और अगर आप कहें कि फिल्म को हिट एक विशेष नायक अवश्य कर सकता था तो लोग समझेंगे की आपका दिमाग खराब हो गया है।




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इश्क तो इश्क है। उसका कोई मजहब नहीं कोई जात नहीं। पर उसमे कोई खोट या छल शामिल नहीं होना चाहिए। अगर ऐसा हुआ तो या वो तो मर सकता है या फिर मार सकता है। बस कुछ ऐसा ही सन्देश देने की कोशिश करती है निर्देशक हबीब फैजल की फिल्म इशकज...
कहते हैं जनम कोई भी हो, समय,रिश्ते लोग और उनके मंतव्य वैसे ही रहते हैं जैसे वो अपनी किसी दूसरे जन्म में रहे होते हैं । बस रिश्तों और हालातों के कुछ चेहरे बदल जाते हैं। निर्देशक विक्रम भट्ट की थ्री डी तकनीक में बनी नयी फिल्म डे...