कांग्रेस की डगर पे...
- कविता |
- जितेंद्र गुरिल्ला |
- मंगलवार, 08 मई 2012 15:11
कांग्रेस की डगर पे चमचों दिखाओ चल के
यह देश है तुम्हारा खा जाओ इसको तल के
योग गुरू बाबा रामदेव
- कविता |
- ध्रुव सोनी |
- बुधवार, 04 अप्रैल 2012 12:36
योग गुरु बन कर बाबा तुमने
ना जाने कितनी जिंदगियां संवारी हैं
फागुन के आधुनिक दोहे
- कविता |
- प्रदीप गुप्ता |
- शुक्रवार, 09 मार्च 2012 11:24
कैसी मस्ती छा गई फागुनी पवन के संग,
कहीं ढोल पर थाप है, कहीं बजे मृदंग।
मेरी साँसों में यही दहशत समायी रहती है-.
- कविता |
- ** |
- मंगलवार, 24 जनवरी 2012 12:29
मेरी साँसों में यही दहशत समायी रहती है
मज़हब से कौमें बँटी तो वतन का क्या होगा ।
नए साल के लिए कुछ खास दोहे और गज़लें
- कविता |
- मीडिया डेस्क |
- शनिवार, 31 दिसम्बर 2011 13:20
नए साल के मौके पर हमारे पाठकों ने कुछ चुनिंदा गज़लें भेजी है –नए साल की शुभकामनाओं के साथ प्रस्तुत है ये यादगार गज़लें-जो आपको अपने आसपास के माहौल से रु-ब-रु कराते हुए कुछ सोचने पर मजबूर करेगी।
स्वागत है नव वर्ष तुम्हारा
- कविता |
- ** |
- रविवार, 01 जनवरी 2012 13:09
स्वागत है नव वर्ष तुम्हारा, अभिनंदन नव वर्ष तुम्हारा
देकर नवल प्रभात विश्व को, हरो त्रस्त जगत का अंधियारा
आओ बच्चों तुम्हें दिखाएँ झाँकी घपलिस्तान की।
- कविता |
- एक पाठक की कलम से |
- गुरूवार, 20 अक्टूबर 2011 17:49
आओ बच्चों तुम्हें दिखाए झाँकी घपलिस्तान की।
इस मिट्टी पे सर पटको ये धरती है बेईमान की।
पगफेरा
- कविता |
- एषा दादावाला |
- सोमवार, 03 अक्टूबर 2011 17:00
बिटिया को अग्निदाह दिया,
और उससे पहले ईश्वर को,
डेथ सर्टिफिकेट
- कविता |
- एषा दादावाला |
- सोमवार, 03 अक्टूबर 2011 16:56
प्रिय बिटिया
तुम्हें याद होगा
जब तुम छोटी थी,
ताश खेलते समय
क्या ये भारत देश है मेरा ?
- कविता |
- आर्ची मिश्रा पचौरी,गुडगाँव |
- बुधवार, 24 अगस्त 2011 16:08
जहाँ पग पग पे महगाई,
आशिक्षा और घोटालो का डेरा
अन्ना की हुँकार ने झुकाई सरकार
- कविता |
- आर्ची मिश्रा पचौरी |
- मंगलवार, 23 अगस्त 2011 10:28
अन्ना तेरे राज में झुक रही सरकार,
विपक्ष भी देखो ले रही कैसी करवट यार
एक हुंकार -अन्ना हजारे की समर्थन में ..
- कविता |
- कवि दीपक शर्मा |
- गुरूवार, 18 अगस्त 2011 05:30
हाथ खोलो ,घर से निकलो ,कब तलक खामोश रहोगे
बात अपनी अब तो कह दो ,कब तलक खामोश रहोगे
बढ के अपना मांग लो हक़,किस बात का है खौफ तुमको
कब तलक मिमयाते रहोगे ,कब तलक खामोश रहोगे ..




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