घोस्ट राइडर : स्पीरिट ऑफ़ वेंजन्स [अंग्रेजी एक्शन फतांसी फिल्म]
- फिल्म समीक्षा
- सोमवार, 20 फरवरी 2012 13:36
- रामकिशोर पारचा
दो टूक : जिंदगी बचाना एक बात है और किसी की जिंदगी को बचाने के लिए अपनी जिंदगी को एक अभिशाप बना लेना दूसरी।मार्वल कॉमिक्स को आधार मानकर रची गई निर्देशक जोड़ी नेवेलदीन और ब्रायन टेलर की निकोलस केज ,फर्ग्युस रिओरदान, वियोलैंट प्लैसिडो, सायरन हिंड्स ,इदरिस एल्बा और जॉनी वाईट वर्थ के अभिनय वाली फिल्म घोस्ट राइडर की दूसर कड़ी भी अपने कथानक में शामिल नायक के एक ऐसे ही श्राप और उसके परिणामों को दिखाने वाली है।
कहानी : फिल्म की कहानी जॉनी ब्लेज उर्फ़ घोस्ट राइडर [निकोलस केज] नाम के ऐसे व्यक्ति की है जो अपने पिता को शैतानी ताकतों से बचाने के लिए भुगत रहे श्राप से ग्रस्त है। शैतान ने उसे कुछ ऐसी ताकते सौंपी हैं जो उसे ताकतवर तो बनाती हैं पर उसका परिणाम उसकी जान जाने और कई ऐसे खतरों से जुड़ा है जो उसे भी एक शैतान साबित कर मानवीयता के विरोध में एक पापी बना देते हैं,।।खुद को छुपाने के लिए वो यूरोप के एक बियाबान में रह रहा है । जहाँ उसकी मुलाक़ात एक योधा पादरी मोरो [इदरिस एल्बा] से होती है।मोरो चाहता है कि वो डैनी [फर्ग्युस रिओरदान ] नाम के ऐसे बच्चे को बचा ले जिसे शैतान के सहयोगी रे कैरीगन [जॉनी वाईट वर्थ ] ने किडनैप किया है,।।रे शैतानी ताकतों के मुखिया के तौर पर काम कर रहा है । मोरो का वायदा है कि अगर उसने उस बच्चे को बचा लिया तो वो भी इस श्राप से मुक्त हो जाएगा और अगर वो ऐसा नहीं करता तो डैनी अपनी माँ नद्या [ वियोलैंट प्लैसिडो ] के साथ शैतानी ताकतों के अभिशाप से ग्रस्त हो जायेगा।जॉनी ब्लेज की उस बच्चे को बचाने की जो मुहीम शुरू होती है उसकी सिहराने वाली रोमाँच भरी कहानी है घोस्ट राइडर : स्पीरिट ऑफ़ वेंजन्स।
अभिनय: फिल्म की कहानी का केंद्र बिंदु निकोलस केज हैं। नायक घोस्ट राइडर की भूमिका में वे जमते हैं लेकिन उनकी दिक्कत ये है कि उनके चेहरे पर अभिव्यक्तियाँ कम आती है और वे संवाद भी चबा चबाकर बोलते हैं। वैसे भी इस फिल्म में उनका चेहरा जायदातर समय आग में डूबा रहता है। तो उनकी अभिनय छमता भी दब जाती है। पर एक्शन दृश्यों में उनका जवाब नहीं।।फर्ग्युस रिओरदान अपनी भूमिका में मेहनत करते हैं ।उनकी बाल सुलभ अभिव्यक्तियों के साथ ग्राफिक्स छवियों वाला उनका अभिनय ठीक है। वियोलैंट प्लैसिडो माँ की भूमिका में हैं पर उनकी भूमिका का अवयव तत्व शानदार है। जबकि शैतान बने सायरन हिंड्स की भूमिका को बहुत छोटा रखा गया है। मोरो बने इदरिस एल्बा अपने पात्र के चरित्र को जीवन्तता से जीते हैं पर उनके शेड्स कुछ ग्रे हैं।जॉनी वाईटवर्थ फिल्म का सबसे महत्वपूर्ण चरित्र हैं।जब आते है तो सिहरा देते हैं।फिल्म में और कई छोटे छोटे पात्र और चरित्र हैं पर उनमे जयादातर याद नहीं रहते।
निर्देशन : दरअसल ये फिल्म एक कॉमिक पर आधारित है सो इसकी पटकथा लिखना और उसे संयोजित करना चुनौती भरा काम है। यही नहीं फिल्म में विशेष प्रभावों और एक्शन दृश्यों को ज्यादा महत्व दिए जाने के कारण इसकी कहानी और पटकथा भी कुछ कमजोर हो गई है।फिल्म अपने पहले हिस्से में जिस रोमाँच की बात करती थी वो इसमें है तो सही पर उसका कोई नया विस्तार नहीं दिखाई देता।डेविड गोयर की कहानी की नाटकीयता में सबकुछ जाना पहचाना है।पर इसके बावजूद फिल्म में उत्सुकता बनी रहती है तो सिर्फ इसलिए कि तकनिकी तौर पर फिल्म बहुत मजबूत है। फिल्म में अमेरिका और तुर्की के शानदार दृश्य हैं और विशेष कम्प्यूटर जनित छवियों के साथ नेवेलदीन और टेलर की जोड़ी ने ब्रैंडन त्रोस्ट की सिनेमाटोग्राफी का भी अद्भुत इस्तेमाल किया है और भूरे,नारंगी ,लाल रंगों वाली ये फिल्म देखने वाली बन गई है।
पात्र परिचय : निकोलस केज ,फर्ग्युस रिओरदान, वियोलैंट प्लैसिडो, सायरन हिंड्स ,इदरिस एल्बा और जॉनी वाईट वर्थ
निर्देशन : नेवेलदीन और ब्रायन टेलर




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