hindimedia.in

जिन्दगी तेरे नाम (हिंदी ड्रामा )

लेख को साझा करें

रेटिंग ५/२।५

दो टूक - प्यार भी बड़ा अजीब गुंजल  है।पता ही नहीं चलता कि ये कब होता है, क्यों होता है और जब होता है तो कई बार ये भी पता नहीं चलता कि ये क्या चाहता है हमसे। यही नहीं, प्रेम जिस से होता है कई बार हम उसके प्रेम के आसमान की उंचाई के बारे में अंदाजा ही नहीं लगा पाते और खुद को उस से बहुत नीचे रखकर देखने लगते हैं।फिर उसे छोड़ देते हैं ये सोचकर कि शायद हम उसके लायक नहीं।पर कौन जानता है कि प्रेम इस लायक शब्द को नहीं पहचानता। निर्देशक आशु त्रिखा की मिथुन चक्रवर्ती, रंजीता, असीम अली खान, प्रियंका मेहता, आशीष शर्मा, अमित त्रिवेदी, दिलीप ताहिल, सुप्रिया कार्निक, शरत सक्सेना, यतिन कर्येकर और हिमानी शिवपुरी के साथ दिया मिर्जा की भूमिका वाली नयी  फिल्म जिन्दगी तेरे नाम भी एक ऐसे ही प्रेम की कहानी को दिखाती है।

कहानी - फिल्म की कहानी डलहौजी में रहने वाले और वायलिन बनाने का काम करने वाले सिद्धार्थ सिंह (असीम अली खान)की है। सिद्धार्थ अपने दोस्त (अमित त्रिवेदी )के साथ वादियों में सुर और सच के साथ एक ऐसे प्रेम की तलाश में है जो उसे जीवन का अर्थ बता सके।यही नहीं, उसे लगता है कि ऐसी कोई लड़की नहीं जो उसे समझ सके। पर एक दिन जब उसके सामने अंजली (प्रियंका मेहता)आ जाती है तो उसकी जिन्दगी ही बदल जाती है। लेकिन सिद्धार्थ उसकी अमीरी और उसके माता पिता (दिलीप ताहिल और सुप्रिया कार्निक)का सामना नहीं कर पाता और खुद को अंजली के लायक ना मानते हुए उसे छोड़कर चला आता है।पर उसे वो भूल नहीं पाता और अपने पिता (शरत सक्सेना )के साथ रहते हुए उसे रोज चिठ्ठियाँ लिखता है।

अंजली की माँ सिद्धार्थ की चिठ्ठी अंजली तक नहीं आने देती। समय गुजर जाता है और अंजली ये सोचते हुए कि अब सिद्धार्थ नहीं लौटेगा स्पेन से लौटे विशाल (आशीष शर्मा)के साथ नई जिन्दगी शुरू देती है। पर एक दिन जब ठीक उनकी सगाई के दिन अखबार में सिद्धार्थ की खबर छपती है तो वो खुद को रोक नहीं पाती और उस से मिलने चंडीगढ़ से डलहौजी आ जाती है।तमाम बाधाओं के बावजूद उनकी शादी भी हो जाती है पर अंजली अल्जाइमर रोग की शिकार होने लगती है और धीरे धीरे वो अपने प्रेम और सिद्धार्थ को ही नहीं खुद को भी भूल जाती है। समय बीत जाता है और अब सिदार्थ और अंजली उम्रदराज मिथुन और रंजीता )में बदल चुके हैं। फिर भी सिद्धार्थ को यकीन है कि वो अंजली और उसकी याददाश्त को वापस ला सकता है। बस उसके अंजली की यादों और अपने प्रेम को वापस पाने की जद्दोजहद भरी कहानी है जिन्दगी तेरे नाम।
गीत संगीत-  फिल्म में जलीस शेरवानी के लिखे गीत हैं और संगीत वाजिद साजिद की जोड़ी का है।फिल्म में वैसे तो पांच गीत हैं पर वे कुछ याद रखने जैसा चमत्कार नहीं करते।लेकिन इतने बुरे नहीं कि आप सुन न सकें।इसलिए आप चाहें तो के के का गाया तू मुझे सोच कभी ,  शान का मिलने को नहीं आये  जैसे गीत सुन ने वाले हैं।  इसी तरह सुनिधि और वाजिद के साथ मेहमान गीतकार फैज अनवर का लिखा तृष्णा तृष्णा दिल भी ठीक है। पर मेरी पसंद का गीत सुनेंगे तो वो तू मुझे सोच कभी ही है।

अभिनय - फिल्म के केंद्र में मिथुन हैं और वे हमेशा की तरह अद्भुत अभिनय छमता और शारीरक भाषा के साथ सामने आते हैं ।जबकि लम्बे समय बाद दिखाई दी रंजीता को देखना सुखद लगता है।वे अपनी जानी पहचानी शैली में हैं और एक अल्जाइमर रोग से ग्रस्त महिला की भूमिका में प्रभावित करती हैं। ये अलग बात है कि मिथुन  और रंजीता के पात्रों और चरित्रों को कुछ और विस्तार दिया जाना चाहिए था।

फिल्म दो हिस्सों में है एक में मिथुन और रंजीता नायक नायिका हैं और उनके साथ उनकी युवा अवस्था में प्रियंका और असीम अली खान। पर यही दोनों सबसे कमजोर पात्र भी हैं। अमित त्रिवेदी को बहुत मौका नहीं मिला और शरत सक्सेना के साथ दिलीप ताहिल और सुप्रिया कार्निक को भी। मुझे ये समझ नहीं आया कि यतिन कार्येकर और हिमानी शिवपुरी को फिल्म में क्यों रखा गया। रही बात आशीष शर्मा की तो इस से ज्यादा तो वे लव सेक्स धोखा और एक टीवी धारावाहिक  में जमे थे।
निर्देशन- दरअसल फिल्म निक कैसेवेट्स निर्देशित हॉलीवुड फिल्म नोटबुक से प्रेरित है। सो नोटबुक से प्रेरित इस फिल्म में हमें यू मी और हम की छायाएं दिखती हैं जबकि आशु त्रिखा ने इस से पहले बाबर नाम की जबरदस्त विषयक फिल्म बनाई थी। पर इस फिल्म में  उनका विचार शानदार होते हुए भी उसका व्याकरण और बुनाव ठीक से नहीं किया गया। फिल्म में मुख्य पात्रों का दो हिस्सों में चित्रण अच्छा है।उन्होंने अपने पात्रों के लिए कलाकारों का मिलान भी ठीक किया है पर वे अपने शिल्प के वास्तविक स्थापन से उन्हें मिलाकर  सामने लाने में देर लगा देते हैं।

फिल्म में मध्यांतर के बाद कुछ पात्रों और चरित्रों का परिचय भी नहीं देते। फिल्म की गति भी धीमी है और अंत में क्लाइमेक्स में कोई नयी बात नहीं।फिल्म की शुरुआत में ही उसका अंदाजा हो जाता है। हाँ, आशु ने इस अंत तक जाने के लिए रोचकता और जिज्ञासा बनाए रखी है। पर संजय मासूम की लिखी और सत्तर के दशक में डलहौजी की वादियों में गुलशन नन्दा की शैली में रची गयी इस फिल्म को सुहास गुजराथी का कैमरा देखने के मामले में कुछ और शानदार बना सकता था पर उन्होंने उसके कोणों को जयादा इस्तेमाल नहीं किया।

फिल्म क्यों देखें- मिथुन और रंजीता के लिए।

फिल्म क्यों ना देखें- इसमें नया कुछ नहीं है।
 

बुधवार , 22 मई  2013

mp-ad2

वेबसाइट में खोजें

free counters

सबस्क्राइब करे

हिन्दी मीडिया के लेखों को अपने ईमेल पर नियमित रूप से प्राप्त करने के लिए नीचे दिए गए बॉक्‍स में अपना ईमेल लिख दें।

twit.jpg

वीडियो सहायता

हिन्दी मीडिया वीडियो सहायता देखने के लिए यहाँ क्लिक करें.

हमारे मित्र

फेसबुक मित्र

आई डोंट लव यू [हिंदी थ्रिलर] आई डोंट लव यू [हिंदी थ्रिलर] प्रेम भरोसा मांगता है। छल उसे कमजोर ही नहीं बनाता बल्कि उसे दूर भी कर देता है। सो निर्देशक अमित कसारिया की फिल्म आई डोंट लव यू भी ऐसे युवा दिलों की कहानी कहती है . More detail
औरंगजेब [हिंदी थ्रिलर] औरंगजेब [हिंदी थ्रिलर] कहते हैं सपनों की कीमत अपनों से ज्यादा नही होती ..लेकिन कुछ लोग अपने सपनों को पूरा करने के लिए अपनों और रिश्तों को परवाह नहीं करते। औरंगजेब भी एक ऐसे ही साम्राज्य की कहानी कहती है. More detail
आई डोंट लव यू [हिंदी थ्रिलर] आई डोंट लव यू [हिंदी थ्रिलर] प्रेम भरोसा मांगता है। छल उसे कमजोर ही नहीं बनाता बल्कि उसे दूर भी कर देता है। सो निर्देशक अमित कसारिया की फिल्म आई डोंट लव यू भी ऐसे युवा दिलों की कहानी कहती है . More detail
औरंगजेब [हिंदी थ्रिलर] औरंगजेब [हिंदी थ्रिलर] कहते हैं सपनों की कीमत अपनों से ज्यादा नही होती ..लेकिन कुछ लोग अपने सपनों को पूरा करने के लिए अपनों और रिश्तों को परवाह नहीं करते। औरंगजेब भी एक ऐसे ही साम्राज्य की कहानी कहती है. More detail
आई डोंट लव यू [हिंदी थ्रिलर] आई डोंट लव यू [हिंदी थ्रिलर] प्रेम भरोसा मांगता है। छल उसे कमजोर ही नहीं बनाता बल्कि उसे दूर भी कर देता है। सो निर्देशक अमित कसारिया की फिल्म आई डोंट लव यू भी ऐसे युवा दिलों की कहानी कहती है . More detail
औरंगजेब [हिंदी थ्रिलर] औरंगजेब [हिंदी थ्रिलर] कहते हैं सपनों की कीमत अपनों से ज्यादा नही होती ..लेकिन कुछ लोग अपने सपनों को पूरा करने के लिए अपनों और रिश्तों को परवाह नहीं करते। औरंगजेब भी एक ऐसे ही साम्राज्य की कहानी कहती है. More detail

Twitter

My Twitter Updates

Hindi Media मोटापे से निजात पाने हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम: अत्याधुनिक जीवन शैली की प्रमुख देन मोटापा एवं उसके उपरान्त होने... http://t.co/85t0kvIqfo
About 15 hours ago
Hindi Media नया सर्वेः नरेंद्र मोदी ही बेड़ा पार लगाएंगे एनडीए का: अगले साल होने वाले आम चुनावों नरेंद्र मोदी को प्रधान मं... http://t.co/4lvRkXHTV0
About 15 hours ago
FacebookTwitterFeed