बी केयरफुल [हिंदी कॉमेडी ]
- फिल्म समीक्षा
- सोमवार, 24 अक्टूबर 2011 14:29
- रामकिशोर पारचा
दो टूक : प्यार सिर्फ शरीर का नाम नहीं है । वो तो अहसास है आत्मा का, जो दो लोगों के बीच पनपता है और फिर हर पल एक नया विस्तार लेता है पर अगर उसका सम्मान नहीं किया तो बी केयरफुल। बस यही छोटा सा सन्देश देने की कोशिश करती है निर्देशक चंद्रकांत सिंह की रजनीश दुग्गल, जैद शेख, तनिषा मुखर्जी, किरण राठौड़, राजपाल यादव, शिल्पी शर्मा, संजय मिश्रा, असरानी, जॉनी लीवर, टीकू तलसानिया और दिनेश हिंगू के अभिनय वाली फिल्म बी केयरफुल।
कहानी : फिल्म की कहानी समीर उर्फ सैम [रजनीश दुग्गल] और आनंद उर्फ एंडी [जैद शेख] नाम के दो ऐसे युवकों की है जो बचपन के दोस्त हैं। दोनों के लिए प्यार का मतलब सिर्फ सेक्स है। इसी सिलसिले में उनकी मुलाक़ात अंजली [तनिषा मुखर्जी] और किरण [किरण राठौर] नामक लड़कियों से होती है। सैम और एंडी उनके साथ प्यार का नाटक करते हैं। पर हालत ऐसे बनते हैं कि दोनों को उनसे शादी करना पड़ती है।शादी के बाद वे खुलासा करती हैं कि दरअसल वो दोनों के बारे में जानती थी और उन्हें सबक सिखाने के लिए ही वे उनके पास आई है। वे इन दोनों मनचलों के लिए बैंकाक के एक ट्रिप का इंतजाम करती हैं पर उनके पैसे और क्रेडिट कार्ड अपने आपस रख लेती हैं। अब वे वहाँ आजाद तो हैं पर मस्ती के लिए उनके पास कुछ नहीं। अंततः वे होटल के करता धर्ता मि।पंडित [राजपाल यादव ] के साथ सांठ गाँठ करते है जो उनकी मुलाकात कविता [शिल्पी शर्मा] नामक एक लड़की से करवाता है। सैम और एंडी उसके प्रति आकर्षित होते हैं और एक बार फिर उनमें होड़ लग जाती है कि कौन उस अपने जाल में फाँस सकता है। उनके सपने उस समय ध्वस्त हो जाते हैं जब अंजली और किरण भी बैंकॉक आ धमकती हैं। उनके बैंकाक आने एक बाद समीर और आनंद के जो हालत बनते हैं उसी के रोमांच और हास्य की बानगी दिखाने वाली फिल्म है बी केअरफुल। जिसमे असरानी ,टिक्कू सल्तानिया,दिनेश हिंगू, अनंग्षा बिस्वास, हेमंत पण्डे, ट्यूलिप जोशी, स्नेहल धाब्बी, शक्ति कपूर और जॉनी लीवर के पात्र और चरित्र भी शामिल है।
गीत संगीत : फिल्म में कुमार के लिए गीत और संगीत सिद्धार्थ सुहास का है। फिल्म में पांच गीत हैं पर वे ऐसे नहीं कि उन्हें याद रखा जा सके।फिर भी शहीद माल्या ,साशा त्रिपाठी ,हमजा फारुकी और सुहास के गए ये गीत सुने जा सकते हैं। हालांकि फिल्म का गोविन्द बोलो हरी बोलो।।बी केयर फुल जैसे बोलों वाला गीत ही ऐसा है जिसे गुनगुनाया जा सकता है। जबकि सिद्दार्थ माल्या का गया लव टेक्नौलौजी काम चलाऊ है पर सुनने बुरा नहीं लगता। एक और गीत फुर्सत है जिसे हमजा ने गाया है आप उसे भी सुन लें अच्छा लगेगा।
अभिनय :फिल्म के केंद्र में रजनीश दुग्गल और जैद शेख हैं, रजनीश के लिए ये नयी शुरुआत हो सकती है। ये फिल्म उन्हें अपने उस खोल से बाहर आने की छूट देती है उन्होंने मेहनत की है पर फिल्म की कहानी में उनके लिए ऐसा कुछ नहीं था जो उन्हें खुद को साबित करने में मदद करता हो। जबकि जैद शेख के लिए उनसे मुकाबला तगड़ा रहा। दरअसल, ये ऐसे पात्र हैं जो अतिरिक्त भरी मानसिकता वाले हैं सो कोई खास कमाल नहीं करते वे।तनिषा लम्बे समय बाद लौटी है। वे ठीक है और किरण भी पर शिल्पी शर्मा सिर्फ शो पीस बनी रही और उनका ज्यादा ध्यान अंग प्रदर्शन पर ही रहा। जबकि असरानी, टिकू तल्सानिया, दिनेश हिंगू,अनंग्षा बिस्वास,हेमंत पाण्डेय, स्नेहल धाबी जॉनी लीवर और शक्ति कपूर जाने पहचाने हैं।
निर्देशन : फिल्म की कहानी में कुछ नया नहीं है। चंद्रकांत सिंह की पिछली बिन बुलाए बाराती और रामा रामा क्या है ड्रामा की ही तरह इस फिल्म में भी पात्रों और चरित्रों का जमावड़ा है। फिल्म में शुरुआत में ही पता चल जाता है कि हम क्या देखने जा रहे हैं। फिल्म की शूटिंग गोवा और बैंकाक में हुई है पर नजीब खान का कैमरा कोई कमाल नहीं दिखा सका है और इरफ़ान शेख के सम्पादन में एम् सलीम की पटकथा काफी कमजोर है। फिर भी अगर आप इसे देखने का मन बनाए तो कोई घाटा नहीं होगा। बस टाइम पास फिल्म है।
फिल्म क्यों देखें: इस हफ्ते एक ही फिल्म है।
फिल्म क्यों न देखें : अब ऐसी भी नहीं कि आप इसे छोड़ न सके





प्रेम भरोसा मांगता है। छल उसे कमजोर ही नहीं बनाता बल्कि उसे दूर भी कर देता है। सो निर्देशक अमित कसारिया की फिल्म आई डोंट लव यू भी ऐसे युवा दिलों की कहानी कहती है .
कहते हैं सपनों की कीमत अपनों से ज्यादा नही होती ..लेकिन कुछ लोग अपने सपनों को पूरा करने के लिए अपनों और रिश्तों को परवाह नहीं करते। औरंगजेब भी एक ऐसे ही साम्राज्य की कहानी कहती है.