प्लेटफॉर्म पर इडली बेचने वाली माँ का सपना साकार किया!
- भारत गौरव
- बुधवार, 22 फरवरी 2012 16:25
- सुंदरबुद्धन

चेन्नई के ई शरत बाबू ने पहले बिट्स पिलानी से इंजीनियरिंग की और फिर 2004 में आईआईएम अहमदाबाद से मैनेजमेंट। 31 साल के शरत उस माँ के बेटे हैं जो प्लेटफार्म पर इडली बेचा करती थी। गरीबी में बचपन बिताने वाले शरत बाबू बहुत कुछ बदलना चाहते हैं। बदलाव के इस सपने को सुनहरे सच में तब्दील करने के लिए उन्होंने राजनीति के मैदान में कदम रखा है।
शरत ने इंफोसिस के नारायणमूर्ति की मदद से सात करोड़ रुपए की हैसियत वाली फूड किंग कैटरिंग सर्विस खड़ी की है। आज चेन्नई और हैदराबाद में उनकी कई शाखाएं हैं। व्यापार बढ़ रहा है, मगर राजनीति में उनका सफर जारी है। इसकी शुरुआत 2009 में तब हुई थी जब उन्होंने दक्षिणी चेन्नई से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ा था। उन्हें 15,890 वोट मिले, जिनमें से 5,800 वोट केवल वेलाचेरी में पड़े थे।
2011 के विधानसभा के चुनाव में उन्हें वेलाचेरी से 7,464 वोट मिले जो बीजेपी के वोटों से ज्यादा थे। शरत कहते हैं, '2001 में बिहार गया तो मुझे पता चला कि 30 फीसदी लोग भुखमरी का शिकार हैं। मैंने तय किया कि कंपनी खोलकर लोगों को रोजगार दूंगा। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए जो लोन लिया था उसे वापस करना था, इसलिए 3 साल तक नौकरी करनी पड़ी। फिर अहमदाबाद में सिर्फ 2,000 रुपए से फूड किंग की शुरुआत की। मेरा मानना है कि राजनीति में युवाओं का सक्रिय होना जरूरी है। इसीलिए मैंने राजनीति को चुना।'
शरत हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के निमंत्रण पर अमेरिका गए थे और वहां राजनीति पर आधारित वर्कशॉप में शामिल हुए। वह कहते हैं, 'धन और बाहुबल के बिना चार फीसदी वोट हासिल करना बड़ी बात नहीं है मगर सफर बहुत लंबा है। मैं 2014 का लोकसभा चुनाव भी लडूंगा। मैं न कोई पार्टी ज्वाइन करना चाहता हूं और न नई पार्टी बनाना चाहता हूं। मेरा मकसद युवाओं को राजनीति में आने के लिए प्रेरित करना भर है। अगर मैंने युवाओं में राजनीति में आने का जोश और जुनून भर दिया, तो भी मैं खुद को कामयाब समझूंगा।
साभार-संडे इंडियन से




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