‘आसमान छूने’ की राह पर निकला दंतेवाड़ा
- भारत गौरव
- शुक्रवार, 30 सितम्बर 2011 15:47
- सलमान रावी, बीबीसी संवाददाता, रायपुर
छत्तीसगढ़ का दंतेवाड़ा ज़िला हमेशा सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच चल रही हिंसा के दौर के लिए जाना जाता रहा है। ये पूरे देश का सबसे संवेदनशील इलाका माना जाता है जहाँ कोई आना नहीं चाहता। नक्सली गतिविधियों और सरकारी दमन के आरोपों से निकलकर दंतेवाड़ा अब अपनी एक नई पहचान बनाने जा रहा है। बहुत जल्द ही ये पूरे देश का एक मात्र ऐसा ज़िला होगा जिसके पास 170 एकड़ में फैली अपनी ‘एजुकेशन सिटी’ होगी।
इस योजना पर काम जोर-शोर से चल रहा है और ये योजना साल 2014 तक पूरी कर ली जाएगी। इस बीच जहाँ इस ‘एजुकेशन सिटी’ के निर्माण का काम चल रहा है वहीं प्रशासन ने पूरे ज़िले से छात्रों को जमा कर उन्हें निजी स्कूलों में दाखिले के साथ-साथ इंजीनियरिंग और मेडिकल सहित अन्य व्यावसायिक शिक्षा दिलाने के लिए प्रशिक्षण देना भी शुरू कर दिया है।
ये सब कुछ सरकारी खर्चे पर हो रहा है। एजुकेशन सिटी के आने से पहले ही दंतेवाड़ा ज़िला मुख्यालय में पूरे ज़िले से 400 छात्र छात्राएं प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं और वह भी देश के जाने माने कोचिंग संस्थानों के शिक्षकों के ज़रिये।
योजना की कहानी: छू लो आसमान’ के नाम से शुरू की गयी ये योजना कैसे अमल में आई इसकी एक रोचक कहानी है। दंतेवाड़ा के 29 वर्षीय कलेक्टर ओम प्रकाश चौधरी कहते हैं कि शाला प्रवेश उत्सव के दौरान ज़िले के होनहार छात्रों को मंत्री के हाथों पुरुस्कार दिए गए थे।
उस समारोह में गोपाल नाम के लड़के ने कलेक्टर से कहा कि वह भी मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी करना चाहता है मगर दंतेवाड़ा में इसकी सुविधा नहीं है।
ओम प्रकाश चौधरी ने बीबीसी को बताया, " बस वहीं से मेरे दिमाग में आया कि यहाँ भी ऐसा कुछ करना चाहिए ताकि छात्रों को आगे की तैयारी में मदद मिल सके। ”
दंतेवाड़ा जिले में विज्ञान और गणित के शिक्षकों की भारी किल्लत है। यही वजह है कि कई इलाकों में गणित और विज्ञान की पढाई इस लिए नहीं हो पा रही है।
ओम प्रकाश चौधरी कहते हैं, "हमारे पास गणित और विज्ञान के शिक्षक नहीं हैं। यहाँ डाक्टरों और इंजींनियरों की कमी है। इस कारण एक ऐसा चक्र बन रहा था जिसके तहत ना तो इस इलाके से कोई डाक्टर बन पा रहा है ना इंजीनियर। हम इस चक्र को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। "
जबतक नए भवन बनकर तैयार नहीं हो जाते तबतक छात्रों के पढ़ने और रहने की व्यवस्था खाली पड़े सरकारी भवनों में की गई है।
प्रशासनिक अधिकारी नागेश कहते हैं कि प्रशासन ने विज्ञान और गणित के छात्र और शिक्षकों को एक जगह इकट्ठा कर लिया है।
'हम ख़ुश हैं ' प्रशासनिक अधिकारी जीतेन्द्र नागेश ने बीबीसी को बताया कि पूरे जिले के सब गणित और विज्ञान के छात्रों को दंतेवाड़ा ज़िला मुख्यालय में इकठ्ठा कर लिया गया है, साथ ही पूरे जिले में जितने भी विज्ञान और गणित के शिक्षक हैं उन्हें भी बुला लिया गया है।
दंतेवाड़ा के सुदूर इलाकों से ज़िला मुख्यालय में जमा छात्र छात्राओं को पढ़ाने के लिए प्रशासन नें प्रोफेशनल कोचिंग इंस्टिट्यूट की मदद ली है। दंतेवाड़ा आकर बच्चों को व्यावसायिक शिक्षा के लिए तैयार कर रहे कुछ शिक्षक आईआईटी से पढ़ कर आए हुए हैं। इन शिक्षकों के लिए भी दंतेवाड़ा में पढ़ाना एक नई चुनौती है।
आईआईटी रुड़की से पढ़ाई पूरी कर आए राकेश पटेल का कहना है कि ये उनके जीवन की सबसे बड़ी चुनौती है। पटेल से साथ ही आए अन्य शिक्षकों के लिए भी दंतेवाड़ा में पढ़ाना एक अलग अनुभव है। राकेश पटेल कहते हैं, "मगर हम खुश हैं कि हमें छात्रों का भविष्य तराशने का मौका मिला है। "
दंतेवाड़ा में हो रही हिंसा से ग्रामीणों के अलावा छात्र भी बुरी तरह प्रभावित हैं। यही वजह है कि इस ज़िले की साक्षरता दर मात्र 42 प्रतिशत है। दंतेवाड़ा में शिक्षा का जो अब माहौल बना है उससे यहाँ के छात्रों को उम्मीद बंधी है।
साभार-बीबीसी हिन्दी से




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