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02-10-2014

हिंदी मीडिया में कैरियर पर द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

chennai1चेन्नई। मीडिया और फिल्म क्षेत्र में हिंदी भाषा एक अच्छा व सुनहरा कैरियर दे सकती है - आवश्यकता है लगन, मेहनत व भाषा पर पकड़ स्थापित करने की. हिंदी उन्मुखी कैरियर पर यह विचार स्टेला मैरिस कॉलेज के हिंदी विभाग व तमिलनाडु हिंदी साहित्य अकादमी के संयुक्त सौजन्य से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में उभर कर सामने आया।

स्टेला मैरिस कॉलेज के परिसर में आयोजित “कैरियर है पहली प्राथमिकता:हिंदी (फिल्म, दूरदर्शन व आकाशवाणी)” विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में पधारे केंद्रशासित प्रदेश पुदुचेरी के उपराज्यपाल डॉ. इकबाल सिंह, विशिष्ट अतिथियों केंद्रीय हिंदी निदेशालय, चेन्नई के उपनिदेशक डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, हैदराबाद के प्रोफ़ेसर एवं अध्यक्ष डॉ. ऋषभ देव शर्मा, पांडिचेरी विश्वविद्यालय की हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. पद्मप्रिया, तुलनात्मक भाषा व संस्कृति अध्ययनशाला, इंदौर की अध्यक्ष प्रो.बी. वाई. ललिताम्बा ने दीप-प्रज्वलित कर किया इससे पहले उपराज्यपाल की अगवानी कॉलेज की प्राचार्य सिस्टर डॉ. सी. जेसिता सी. क्वाड्रस अकादमी की संस्थापक डॉ. मधु धवन, कॉलेज की सचिव डॉ. सूजन ओमान, हिंदी विभाग की प्रवक्ता डॉ. श्रावणी पांडा व डॉ. मधु शर्मा ने की. उद्घाटन के बाद प्राचार्य ने हिंदी में उद्बोधन किया. अकादमी की अध्यक्ष डॉ. वत्सला किरण ने मुख्य अतिथि का परिचय दिया तथा महासचिव डॉ. निर्मला एस. मौर्य ने संस्था पर सारगर्भित तरीके से प्रकाश डाला और राष्ट्रीय संगोष्ठी के विषय चयन को स्पष्ट करते हुए कहा, ‘आज दिशा देना जरूरी है।’

रामचरितमानस तमिल में
विशिष्ट अतिथियों ने संक्षेप में संगोष्ठी की प्रासंगिकता तथा रेडियो, टेलिविज़न और फिल्मों के बदलते स्वरुप के संदर्भ में रोजगार की भाषा के रूप में हिंदी की अपार संभावनाओं की ओर संकेत किया. कवि एवं साहित्यकार रमेश गुप्त नीरद के अतिरिक्त डॉ. मधु धवन ने पावर पाइंट प्रेजन्टेशन के माध्यम से नवमीडिया और हिंदी के अंतर्संबंध पर अपनी बात प्रस्तुत की। कॉलेज की ओर से परंपरागत तरीके से सम्मान के बाद उपराज्यपाल ने तमिल-हिंदी के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. एम. शेषन द्वारा तमिल में अनूदित रामचरितमानस, डॉ. एन. जयश्री की कृष्णा सोबती एवं नारी अस्मिता, व्यंग्यकार प्रह्लाद श्रीमाली की ‘माटी जैसी घुन’ समेत आठ पुस्तकों का विमोचन किया. इकबाल सिंह ने हाल ही में पीएच.डी. करने वाली डॉ. श्रावणी, डॉ. तुलसी, डॉ. कृपानाथ सिंह व वरिष्ठ अनुवादक पी.के. बालसुब्रह्मण्यम एवं कॉलेज की छात्राओं के क्लब ‘अनुभूति’ के सदस्यों का सम्मान भी किया।

भाषा में रम जाओ : डॉ. इकबाल सिंह
पुदुचेरी के उपराज्यपाल इकबाल सिंह ने राष्ट्रीय संगोष्ठी के विषय की सराहना करते हुए कहा कि दक्षिण ने देश को बहुत कुछ दिया है - वह चाहे संस्कृति हो या भाषा अथवा फिर संगीत. कमल हासन, रेखा व जयप्रदा का ज़िक्र करते हुए उनका कहना था कि कैरियर की दृष्टि से हिंदी फिल्मों व इनसे जुड़े विभिन्न आयामों व धारावाहिकों का भविष्य उज्ज्वल है. यही परिदृश्य रेडियो व टीवी का भी है. उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे भाषा सीखें और इसमें इतना आगे बढ़ें कि भाषा उनका अनुसरण करने लगे. उपराज्यपाल ने याद दिलाया कि “भारत-चीन भाषा की दृष्टि से विश्व में अग्रणी हैं। विश्व में कई ऐसे देश हैं जहां हिंदीभाषी प्रधानमंत्री हैं. हमें हिंदी को सीखना व जीवित रखना है. हिंदी के अलावा हमें मातृभाषा का भी विकास-विस्तार करना चाहिए. सीखना एक सतत प्रक्रिया है लेकिन यह ध्यान देना होगा कि हम कुछ गलत नहीं सीखें।”

मीडिया, कैरियर और हिंदी
उद्घाटन के बाद विशेष सत्र का आयोजन हुआ. ‘’सिनेमा और कैरियर’’ विषयक इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. ऋषभ देव शर्मा ने की. दूसरे सत्र में फ़िल्मी chennai-2गीत-संगीत से जुड़े हिंदी रोजगारों पर प्रकाश डाला गया जिसकी अध्यक्ष प्रो. बी.वाई. ललिताम्बा थीं, विषय विशेषज्ञ गायक व संगीतकार कुलदीप सागर थे और संचालन कवि ईश्वर चंद्र झा ‘करुण’ ने किया. दूसरे दिन डॉ. पद्मप्रिया की अध्यक्षता में रेडियो और टेलिविज़न के चैनलों में हिंदी संबंधी रोज़गार की संभावनाओं पर व्यापक चर्चा हुई. इस संगोष्ठी की एक बड़ी उपलब्धि यह रही कि विभिन्न सत्रों में चेन्नई के विभिन्न कॉलेजों के लगभग 70 छात्र-छात्राओं ने हिंदी में पत्र-वाचन किया।

युद्ध के पलों में प्रेम की स्मृति
वीमेंस क्रिश्चियन कॉलेज की छात्राओं ने भावपूर्ण नृत्यों की प्रस्तुति द्वारा इस द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी को अतिरिक्त रंजकता प्रदान की.. संयोजिका डॉ. श्रावणी पांडा ने रवींद्र नाथ टैगोर के गीतों पर मनोरम नृत्य प्रस्तुत किया तों पुदुचेरी से पधारीं डॉ. पद्मप्रिया और अतुल्या ने युद्ध के पलों में प्रेम की स्मृति विषयक डॉ. धर्मवीर भारती की काव्यकृति ‘कनुप्रिया’ से जोड़कर सिनेमा के गीतों पर शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुत करके दर्शकों को मुग्ध कर दिया।


चित्र परिचय-
1.
स्टेला मैरिस कॉलेज और तमिलनाडु हिंदी साहित्य अकादमी द्वारा चेन्नई में आयोजित “कैरियर है पहली प्राथमिकता:हिंदी (फिल्म, दूरदर्शन व आकाशवाणी)” विषयक द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन के अवसर पर दीप-प्रज्वलन : [दाएँ से] पुदुचेरी के उपराज्यपाल डॉ. इकबाल सिंह, डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा, प्रो. ऋषभ देव शर्मा, डॉ. मधु धवन एवं अन्य.
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स्टेला मैरिस कॉलेज और तमिलनाडु हिंदी साहित्य अकादमी द्वारा चेन्नई में आयोजित ’’कैरियर है पहली प्राथमिकता:हिंदी (फिल्म, दूरदर्शन व आकाशवाणी)’’ विषयक द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के अवसर पर मचासीन पुदुचेरी के उपराज्यपाल डॉ. इकबाल सिंह. साथ में सिस्टर डॉ. सी. जेसिंता सी. क्वाड्रस, डॉ. मधु धवन, डॉ. पद्मप्रिया, डॉ.वत्सला किरण, डॉ.प्रदीप कुमार शर्मा, प्रो. बी.वाई. ललिताम्बा, प्रो. ऋषभ देव शर्मा, प्रो.निर्मला एस. मौर्य, रमेश गुप्त नीरद और डॉ. श्रावणी पांडा.

[प्रस्तुति – डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा, सहसंपादक-‘स्रवंति’, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, हैदराबाद- ५०० ००४.]

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