संस्कारी माता ही बच्चों को संस्कारित कर सकती है
- धर्म-दर्शन |
- आचार्य तुलसी |
- शनिवार, 12 मई 2012 11:16
विश्व में दो प्रकार के व्यक्ति होते हैं-एक वे जो जीने का भार ढोते हैं और दूसरे वे जो जीवन को संजोते हैं। केवल जीना ही जिनका उद्देश्य होता है, वे सार्थक जीवन नहीं जी सकते। जीवन की सार्थकता के लिए आवश्यक है कि वह सुनियेाजित और संस्कारित हो।
अनूठा तप-अनुष्ठान का पर्वः अक्षय तृतीया
- धर्म-दर्शन |
- साध्वीप्रमुखा कनकप्रभा |
- मंगलवार, 24 अप्रैल 2012 10:31

प्रागैतिहासिक काल से यह परम्परा रही है कि आज के दिन राजा अपने देश के विशिष्ट किसान को राज दरबार में आमंत्रित करता था और उन्हें अगले वर्ष बुवाई के लिए विशेष प्रकार के बीज उपहार में देता था।
कथा हनुमानजी के जन्म की तथा श्लोक व आरती
- धर्म-दर्शन |
- मीडिया डेस्क |
- गुरूवार, 05 अप्रैल 2012 18:22
शास्त्रों में हनुमानजी को वातात्मज भी कहा गया है, वातात्मज यानी जो वायु से उत्पन्न हुआ हो।
हनुमान जयंती पर विशेषः हर बाधा से बचाते हैं हुनमान
- धर्म-दर्शन |
- डॉ. दुर्गेश शंकर सामंत |
- शुक्रवार, 06 अप्रैल 2012 00:00
जब भी दास्य भक्ति का सर्वोत्कृष्ट उदाहरण देना होता है तो हनुमान की रामभक्ति का स्मरण होता है। हनुमान अर्थात शक्ति व भक्ति का संगम। चैत्रपूर्णिमा को हनुमानका जन्म हुआ था, जो आज `हनुमान जयंती' के रूप में मनाई जाती है ।
महावीर बनने की तैयारी करें
- धर्म-दर्शन |
- ललित गर्ग |
- गुरूवार, 05 अप्रैल 2012 00:00
सदियों पहले महावीर जनमे। वे जन्म से महावीर नहीं थे। उन्होंने जीवन भर अनगिनत संघर्षों को झेला, कष्टों को सहा, दुख में से सुख खोजा और गहन तप एवं साधना के बल पर सत्य तक पहुंचे, इसलिये वे हमारे लिए आदर्शों की ऊंची मीनार बन गये।
महावीर जयंती 5 अप्रैल पर विशेषः आज फिर महावीर की जरूरत है
- धर्म-दर्शन |
- गणि राजेन्द्र विजय |
- गुरूवार, 05 अप्रैल 2012 00:00
भगवान महावीर भारतीय संस्कृति के एक देदीप्यमान नक्षत्र थे, जो अपनी संपूर्ण दीप्ति के साथ उद्भासित होते रहे। उनकी चारित्रिक आभा, मृत्युंजयी तपः साधना, अनाहत ज्ञानधारा और समुज्ज्वल सम्यक्त्व की प्रभा पूंजीभूत होकर लोक आस्था को दृढ़ता से थामे हुए है।
राम देत नहिं बनई गोसांई- रामनवमी पर विशेष
- धर्म-दर्शन |
- मीडिया डेस्क |
- शनिवार, 31 मार्च 2012 13:18
एक बार महर्षि विश्वामित्र अयोध्या के राजा दशरथ से मिलने आये। राजा ने उनकी पूजा-अर्चना की और कहा - हे महर्षि अपना मनोरथ बताएँ,
अमजद हुसैन हनुमान के रूप में
- धर्म-दर्शन |
- मीडिया डेस्क |
- शनिवार, 31 मार्च 2012 13:07
यह विचित्र संयोग है कि हनुमान के नाम के साथ जो ‘मान’ लगा है वह शब्द मुसलमान में भी मौजूद है। शायद इसी ‘मान’ को कायम रखने का काम कर रहे हैं राँची के गाँधीनगर इलाके में रहने वाले अमजद हुसैन, जो मुसलमान हैं मगर रामनवमी को हनुमान बन जाते हैं।
एक बैंक, जो राम नाम का कर्ज देती है
- धर्म-दर्शन |
- मीडिया डेस्क |
- शनिवार, 31 मार्च 2012 13:02
वाराणसी, काशी या बनारस का नाम सुनते ही मन को एक अध्यात्मिक शांति सी महसूस होती है। यहाँ पर राम भक्तों का एक विचित्र किंतु सत्य ‘राम रमापति बैंक’ है, जहाँ राम के भक्तों को राम नाम का कर्ज दिया जाता है।
श्रीरामनवमी का सामाजिक, धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व
- धर्म-दर्शन |
- मीडिया डेस्क |
- शनिवार, 31 मार्च 2012 12:55
श्री विष्णु के सातवें अवतार श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में हम रामनवमी का पर्व मनाते हैं। चैत्र शुक्ल नवमी को रामनवमी कहते हैं।
राम वनवास और भरत राज
- धर्म-दर्शन |
- आर.एम.पी. सिंह |
- शनिवार, 31 मार्च 2012 12:43
राम वनवास के पश्चात् 14 वर्षों तक अयोध्या में भरत का राज था। श्री राम से मार्गदर्शन प्राप्त कर भरत ने अयोध्या में एक सलाहकार मंडल के माध्यम से शासन किया। वे राजमद से विलग थे। अपने परिवार से पृथक रहकर एक 'दार्शनिक राजा' की भूमिका में रहे।
राम पथ पर विशेष : जहँ जहँ राम चरण चलि जाहीं
- धर्म-दर्शन |
- आरएमपी सिंह |
- शनिवार, 31 मार्च 2012 12:37
रामायण का अर्थ होता है राम की यात्रा का वृतांत। अयोध्या से लेकर श्रीलंका तक की यात्रा के दौरान घटित घटनाओं का चित्रण ही रामायण है। चौदह वर्ष की अवधि में राम कहाँ-कहाँ गये, यह चित्रित करना कठिन ही नहीं असंभव भी है।
होली के मोहक रंगः जीवन के संग
- धर्म-दर्शन |
- ललित गर्ग |
- बुधवार, 07 मार्च 2012 08:29
यूँ तो हमारा देश त्यौहारों का देश है। हर माह कोई न कोई रंग-बिरंगा और सजीला त्यौहार होता है। लेकिन माघ एवं फाल्गुन-ये दो माह मदनोत्सव से जुड़े हैं। मदन का दूसरा नाम है-प्रणय, प्रेम और श्रृंगार।
अधर्म पर धर्म की जीत की याद दिलाती शहादत-ए-हुसैन
- धर्म-दर्शन |
- तनवीर जाफ़री |
- मंगलवार, 06 दिसम्बर 2011 12:19
अंग्रेज़ी कैलंडर वर्ष की शुरुआत हो या अन्य दूसरे पंथों द्वारा अपनाए जाने वाले वार्षिक कैलंडर की बात हो लगभग सभी नववर्षों की शुरुआत पूरे विश्व में पूरे हर्षोल्लास व स्वागतपूर्ण वातावरण में की जाती है।
विजय यात्रा की पूर्णता का नाम है विजयादशमी
- धर्म-दर्शन |
- आचार्य गणेश शास्त्री |
- बुधवार, 05 अक्टूबर 2011 17:07
दानवता पर मानवता की विजय का प्रतीक पर्व है- विजयादशमी। व्सत्यमेव जयते नानृतम्व् यह भारतीय उद्घोष भारतीय संस्कृति की उस दिव्यता का साक्षात्कार कराता है, जिसमें भारत की आध्यात्मिकता समाहित है।
अमिताभ बच्चन की हनुमान चालीसा
- धर्म-दर्शन |
- janki |
- बुधवार, 05 अक्टूबर 2011 16:57
अब आप अमिताभ बच्चन की आवाज में भजनों, खासकर हनुमान चालीसा सुन सकेंगे।
प्रकृति का उत्सव है नवरात्रि
- धर्म-दर्शन |
- संतोष राव |
- गुरूवार, 29 सितम्बर 2011 10:42
नवरात्रि वास्तविक अर्थों में प्रकृति का उत्सव है। इन नौ दिनों में मां के विभिन्न स्वरूप हमें प्रकृति दर्शन के कई रहस्यों से अवगत कराते हैं। साथ ही यह रूप हमें अपने जीवन के लिए भी विभिन्न संदेश भी देते हैं।
नवसृजन का पर्व है नवरात्रि
- धर्म-दर्शन |
- मीडिया डेस्क |
- बुधवार, 28 सितम्बर 2011 12:00
भारतीय वाङमय में हर दिन और हर समय काल का महत्व है। नवरात्रि का तो विशेष महत्व है, क्योंकि यह ऋतु परिवर्तन के साथ ही प्रकृति के नवसृजन का शुभारंभ भी है। नवरात्रि के प्रथम दिवस से ही संपूर्ण प्रकृति एक नई अंगड़ाई लेती है।
विश्वकर्मा जयंतीः सृष्टि के पहले वास्तु शास्त्री हैं भगवान विश्वकर्मा
- धर्म-दर्शन |
- संदर्भ से |
- शनिवार, 17 सितम्बर 2011 11:19
हमारे देश में विश्वकर्मा जयंती (17 सितंबर) पूरे धूमधाम से मनाई जाती है। इस दिन देश के विभिन्न राज्यों में, खासकर औद्योगिक क्षेत्रों, फैक्ट्रियों, लोहे की दुकान, वाहन शोरूम, सर्विस सेंटर आदि में पूजा होती है।
पितृपक्ष में व्रह्मचर्य का पालन
- धर्म-दर्शन |
- पीताम्बर झा |
- बुधवार, 14 सितम्बर 2011 18:18
हर साल आश्विन के कृष्ण पक्ष में पितृपक्ष आता है, जो १५ दिनों तक चलता है, जिसमें पितरों को पानी दिया जाता है, श्राद्र्ध कर्म करके अपनी वैभव के अनुसार ब्राह्मण भोजन कराया जाता है तथा दान-दक्षिणा दिया जाता है।




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