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20-04-2014

हिन्दी फिल्मों में राष्ट्रभक्ति गीतों का इतिहास

भारतीय सिनेमा जगत में देश भक्ति से परिपूर्ण फिल्मों और गीतो की एक अहम भूमिका रही है और इनके माध्यम से फिल्मकार दर्शकों में देशभक्ति के जज्बे को आज भी बुलंद करते है। निर्देशक ज्ञान मुखर्जी की वर्ष 1940 में प्रदर्शित फिल्म 'बंधन' संभवत: पहली फिल्म थी, जिसमें देश प्रेम की भावना को रूपहले परदे पर दिखाया गया था।

यूं तो फिल्म 'बंधन' मे कवि प्रदीप के लिखे सभी गीत लोकप्रिय हुए लेकिन 'चल चल रे नौजवान...' के बोल वाले गीत ने आजादी के दीवानों में एक नया जोश भरने का काम किया। अपने इस गीत से प्रदीप ने गुलामी के खिलाफ आवाज बुलंद करने के हथियार के रूप मे इस्तेमाल किया और अंग्रेजों के विरूद्व भारतीयो के संघर्ष को एक नयी दिशा दी।

वर्ष 1943 में देश प्रेम की भावना से ओत प्रोत फिल्म 'किस्मत' प्रदर्शित हुई। फिल्म में प्रदीप के लिखे गीत 'आज हिमालय की चोटी से फिर हमने ललकारा है, दूर हटो ए दुनियां वालो हिंदुस्तान हमारा है' ने जहां एक ओर स्वतंत्रता सेनानियों को झकझोरा वहीं अंग्रेजों की तिरछी नजर के भी वह शिकार हुए।

कवि प्रदीप का यह गीत एक तरह से अंग्रेज सरकार पर सीधा प्रहार था। कवि प्रदीप के क्रांतिकारी विचार को देखकर अंग्रेज सरकार द्वारा गिरफ्तारी का वारंट भी निकाला गया। गिरफ्तारी से बचने के लिये कवि प्रदीप को कुछ दिनों के लिये भूमिगत रहना पड़ा।

कवि प्रदीप का लिखा यह गीत इस कदर लोकप्रिय हुआ कि सिनेमा हॉल में दर्शक इसे बार बार सुनने की ख्वाहिश करने लगे और फिल्म की समाप्ति पर दर्शकों की मांग पर इस गीत को सिनेमा हॉल मे दुबारा सुनाया जाने लगा। इसके साथ ही फिल्म 'किस्मत' ने बॉक्स ऑफिस के सारे रिकार्ड तोड़ दिये और इस फिल्म ने कोलकाता के एक सिनेमा हॉल मे लगातार लगभग चार वर्ष तक चलने का रिकार्ड बनाया।

यूं तो भारतीय सिनेमा जगत में वीरों को श्रद्धांजलि देने के लिए अब तक न जाने कितने गीतों की रचना हुई है लेकिन 'ऐ मेरे वतन के लोगो जरा आंखो मे भर लो पानी जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो कुर्बानी' जैसे देश प्रेम की अदभुत भावना से ओत प्रोत रामचंद्र द्विवेदी उर्फ कवि प्रदीप के इस गीत की बात ही कुछ और है।

वर्ष 1962 मे जब भारत और चीन का युद्व अपने चरम पर था तब कवि प्रदीप परम वीर मेजर शैतान सिंह की बहादुरी और बलिदान से काफी प्रभावित हुये और देश के वीरों को श्रद्धाजंलि देने के लिए उन्होंने गीत की रचना की। सी.रामचंद्र के संगीत निर्देशन मे एक कार्यक्रम के दौरान स्वर साम्राज्ञी लता मंगेश्कर से देश भक्ति की भावना से परिपूर्ण इस गीत को सुनकर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की आंखों में आंसू छलक आये थे। 'ऐ मेरे वतन के लोगों'..आज भी भारत के महान देशभक्ति गीत के रूप मे याद किया जाता है।

वर्ष 1952 में प्रदर्शित फिल्म 'आनंद मठ' का अभिनेत्री गीताबाली पर लता मंगेशकर की आवाज में फिल्माया गीत 'वंदे मातरम्..' आज भी दर्शकों और श्रोताओं को अभिभूत कर देता है। इसी तरह 'जागृति' में हेमंत कुमार के संगीत निर्देशन में मोहम्मद रफी की आवाज में रचा बसा यह गीत 'हम लाए हैं तूफान से कश्ती निकाल के..' श्रोताओं में देशभक्ति की भावना को जागृत किए रहता है।

आवाज की दुनिया के बेताज बादशाह मोहम्मद रफी ने कई फिल्मों में देशभक्ति से परिपूर्ण गीत गाए हैं। इन गीतों में कुछ हैं 'ये देश है वीर जवानो का' 'वतन पे जो फिदा होगा अमर वो नौजवान होगा',' अपनी आजादी को हम हरगिज मिटा सकते नही,' उस मुल्क की सरहद को कोई छू नही सकता जिस मुल्क की सरहद की निगाहबान है आंखे', 'आज गा लो मुस्कुरा लो महफिले सजा लो' ,' हिंदुस्तान की कसम ना झुकेंगे सर वतन के नौजवान की कसम',' मेरे देशप्रेमियो आपस में प्रेम करो देशप्रेमियो' आदि।

कवि प्रदीप की तरह ही प्रेम धवन भी ऐसे गीतकार रहे है, जिनके 'ऐ मेरे प्यारे वतन', 'मेरा रंग दे बसंती चोला', 'ऐ वतन ऐ वतन तुझको मेरी कसम', जैसे देशप्रेम की भावना से ओत प्रोत गीत आज भी लोगो के दिलो दिमाग में देश भक्ति के जज्बे को बुलंद करते हैं।

फिल्म 'काबुली वाला' में पार्श्वगायक मन्ना डे की आवाज में प्रेम धवन का रचित यह गीत 'ए मेरे प्यारे वतन ऐ मेरे बिछड़ चमन' आज भी श्रोताओं की आंखो को नम कर देता है। इन सबके साथ वर्ष 1961 में प्रेम धवन की एक और सुपरहिट फिल्म 'हम हिंदुस्तानी' प्रदर्शित हुई, जिसका गीत 'छोडो कल की बातें कल की बात पुरानी' सुपरहिट हुआ।

वर्ष 1965 में निर्माता -निर्देशक मनोज कुमार के कहने पर प्रेम धवन ने फिल्म 'शहीद' के लिए संगीत निर्देशन किया। यूं तो फिल्म
शहीद के सभी गीत सुपरहिट हुये लेकिन 'ऐ वतन ऐ वतन...' और 'मेरा रंग दे बंसती चोला..' आज भी श्रोताओं के बीच शिद्दत के साथ सुने जाते है।

प्रेम धवन ने सैनिकों के मनोरंजन के लिए लद्दाख और नाथुला में सुनील दत्त और नरगिस के साथ दौरा किया और अपने गीत-संगीत से सैनिकों का मनोरंजन किया।

भारत-चीन युद्ध पर बनी चेतन आंनद की वर्ष 1965 में प्रदर्शित फिल्म 'हकीकत' भी देश भक्ति से परिपूर्ण फिल्म थी। मोहम्मद रफी की आवाज में कैफी आजमी का लिखा यह गीत 'कर चले हम फिदा जानों तन साथियो अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों..' आज भी श्रोताओं में देशभक्ति के जज्बें को बुलंद करता है।

इसी तरह गीतकारो ने कई फिल्मों में देशभक्ति से परिपूर्ण गीत की रचना की है इनमें 'जहां डाल डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा वो भारत देश है मेरा', 'ऐ वतन ऐ वतन तुझको मेरी कसम', 'नन्हा मुन्ना राही हूं देश का सिपाही हूं', 'है प्रीत जहां की रीत सदा मैं गीत वहां के गाता हूं', 'मेरे देश की धरती सोना उगले',' हर करम अपना करेगे ऐ वतन तेरे लिए',' दिल दिया है जां भी देगे ऐ वतन तेरे लिए', 'भारत हमको जान से भी प्यारा है', 'ये दुनिया एक दुल्हन के माथे की बिंदिया ये मेरा इंडिया', 'सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है', 'फिर भी दिल है हिंदुस्तानी','जिंदगी मौत ना बन जाये संभालो यारो,' मां तुझे सलाम',' थोड़ सी धूल मेरी धरती की मेरी वतन की' आदि।

साभार- समाचार एजेंसी वार्ता से

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