उमर के साथ साथ किरदार बदलता रहा
- शेरो शायरी |
- दीपक शर्मा |
- शनिवार, 15 अक्टूबर 2011 12:53
उमर के साथ साथ किरदार बदलता रहा
शख्सियत औरत ही रही ,प्यार बदलता रहा ।
बेटी,बहिन,बीबी, कभी माँ , ना जाने क्या -क्या
चेहरा औरत का दहर हर बार बदलता रहा।




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