* वर्त्तमान में जो जैन लोग कहते हैं, गाँधी जी कहते थे, क्या वास्तव में अहिंसा का यही स्वरुप है....?
* नहीं कदापि नहीं, अहिंसा तो निडर, निर्भीक, बलबीर, नैतिकता वाले का ही आचरण हो सकता है, वही अहिंसक हो सकता है.
* ये पंक्तियाँ पढ़े और सोचें.......?
`मां से किए मैंने तीन प्रश्न'
जगदीश जैन
मां!
मोहनदास कर्मचन्द गांधी ने
तथाकथित अहिंसा व
सत्याग्रह के बल पर
इस देश से
अंग्रेजों को भगा दिया था,
और यह देश
आजाद करा लिया था,
तब उन्होंने
शहीदों को
फांसी से क्यों नहीं बचाया?
यह मेरी समझ में
नहीं आया है।
मां!
यदि सत्याग्रह में
इतना ही दम है,
तो,
पांडवों ने कौरवों से
पांच ग्राम लेने के लिए
महाभारत क्यों लड़ा,
नर संहार क्यों करा?
यह मेरा दूसरा प्रश्न है।
मां!
यदि सत्याग्रह में
इतना ही दम है
तो,
भगवान राम व लक्ष्मण ने
रावण से सीता
लेने के लिए
नरसंहार क्यों किया,
सत्याग्रह का सहारा
क्यों नहीं लिया?
यह मेरा तीसरा प्रश्न है।




