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पाठक निरंतर ज्योतिष और इससे जुड़े विषयों पर जानकारी की मांग करते आ रहे
हैं, और यह हमारा सौभाग्य है कि देश-विदेश में जाने-माने और बरसों से
ज्योतिष की साधना में रत, लब्ध प्रतिष्ठित ज्योतिषी पं. केवल आनंद जोशी
हमारे लिए ज्योतिष से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने शोधपूर्ण लेख लिखेंगे।
इसी श्रृंखला में प्रस्तुत कर हैं उनके लेख और वर्ष 2009 के राशिफल।
राशिफल
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भूमध्य रेखा से १२ डिग्री उत्तर की ओर यह राशि स्थिति है जो अश्विनी, भरणी
और कृतिका नक्षत्रों को मिलाकर बनी है। यह मेंढ़े (बकरी) सी प्रतीत होती
है। अंग्रेजी में इसे `एरीज` कहते हैं।
भूमध्य रेखा से २० डिग्री तक इसकी स्थिति मानी गई है। अंग्रेजी में इसे
`टॉरस` कहते हैं। इस राशि में कृतिका रोहिणी और मृगशिरा नक्षत्र आते हैं।
पृथ्वी पर भूमध्य रेखा से १२ डिग्री दक्षिण की ओर से ० (शून्य) डिग्री तक
मीन राशि की स्थिति मानी गई है । इसमें पूर्वा भाद्रपद उत्तर भाद्रपद और
रेवती नक्षत्र पड़ते हैं। यह राशिचक्र की १२वीं राशि है जिसका अधिपति ग्रह
बृहस्पति है।
भूमध्य रेखा से दक्षिण में २० अंश तक इसका स्थान माना गया है। यह राशि
घनिष्ठा शतभिषा और पूर्वभाद्रपद नक्षत्रों को मिलाकर बनी है। अंग्रेजी में
इसे `एक्वारियस` कहते हैं।
पृथ्वी पर भूमध्य रेखा से दक्षिण की ओर २० डिग्री तक इसका स्थान माना गया
है। आधे उत्तरायण से आधे दक्षिणायन की रात्रियों में यह राशि दूरबीन की
सहायता से आकाश में स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है।
पृथ्वी पर भूमध्य रेखा से दक्षिण की ओर २० डिग्री से २५ डिग्री तक इस राशि
का स्थान नियत किया गया है। अंग्रेजी में इसे `सैगिटैरियस` कहते हैं।
भूमध्य रेखा से दक्षिण में विषुवत रेखा पर १२ से २० डिग्री तक यह राशि
स्थिति है। इसके अन्तर्गत विशाखा अनुराधा और ज्येष्ठा नक्षत्र पड़ते हैं ।
इसे अंग्रेजी में `स्कॉर्पिओ` कहते हैं।
भूमध्य रेखा से १२ डिग्री दक्षिण तक तुला राशि का स्थान है। यह राशि चक्र
की सातवीं राशि है और काल पुरूष के पेट में निवास करती है। अंग्रेजी में
इसे `लिब्रा` कहते हैं।
पृथ्वी से उत्तर विषुवत रेखा की ओर १२ डिग्री तक कन्या राशि स्थित है ।
उत्तराफाल्गुनी हस्त और चित्रा नक्षत्र का आधा भाग इस राशि में पड़ता हेै
। इन तीनों नक्षत्रों के अलग अलग गुण स्वाभाविक हैं अत: कन्या राशि के
जातकों में भी विविधता पाई जाती है ।
भूमध्य रेखा से उत्तर विषुवतीय रेखा की ओर २० डिग्री से ३२ डिग्री तक इस
राशि की स्थिति मानी गई है। मघ पूर्वाफाल्गुनी और उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र
इस राशि क्षेत्र में पड़ते हैं। रात्रिकाल में इस राशि के तारों का समूह
हूबहू एक शेर की भांति नजर आता है।
भूमध्य रेखा से उत्तर से १२ से २० डिग्री तक इसका स्थान नियत है। इस राशि
का चिन्ह कर्कट एक जलचर है । अंग्रेजी में इसे `केन्सर` कहते हैं । आकाश
स्थिति नक्षत्रों में पुनर्वसु और आश्लेषा इस राशि में पड़ते हैं ।
भूमध्य रेखा से २४ डिग्री उत्तर तक इसकी स्थिति मानी गई है। राशिचक्र में
तीन नक्षत्रों के संयोग से मिथुन राशि बनी है। इसमें आर्द्रा मृगशिरा और
पुनर्वसु नक्षत्र आते हैं।