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अध्यात्म-गंगा
| पाठकों के लगातार सुझाव और माँग पर हम से ये नया पृष्ठ
शुरु कर रहे हैं। इस पृष्ठ पर हम अपने देश के सिध्द पुरुषों, संतों,
ज्ञानियों और संबुध्दि के शिखर को छूने वाले संबुध्दों के वचनों को स्थान
देंगे। अगर आपके पास किसी ध्यानी, संत या संबोधि प्राप्त किसी संबुध्द के
कीमती वचन हों तो आप भी उन्हें हमें भेज सकते हैं। इस कड़ी में प्रस्तुत
है इस सदी के क्रांतिकारी सद्गुरू ओशो के प्रवचनों के कुछ अंश।
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जीवन का और मृत्यु जैसी कोई चीज ही नहीं है। जीवन ज्ञात होता है, तो जीवन
रह जाता है। और जीवन ज्ञात नहीं होता, तो सिर्फ मृत्यु रह जाती है। मनुष्य
मृत्यु नहीं है, मनु्ष्य अमृत है।
सबसे बड़ा कारण तो यह है की कृष्ण अकेले ही ऐसे व्यक्ति हैं जो धर्म की परम
गहराइयों और ऊँचाइयों पर होकर भी गंभीर नहीं हैं, उदास नहीं हैं, रोते हुए
नहीं हैं। साधारणतः संत का लक्षण ही रोता हुआ होना है।
चमत्कार शब्द का हम प्रयोग करते हैं, तो साधु-संतों का खयाल आता है। अच्छा
होता कि पूछा होता कि मदारियों के संबंध में आपका क्या खयाल है? दो तरह के
मदारी हैं- एक, जो ठीक ढंग से मदारी हैं, 'आनेस्ट'। वे सड़क के चौराहों पर
चमत्कार दिखाते हैं।
जीवन मिलता नहीं है, निर्मित करना होता है।