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माओवादी आतंकवाद सबसे बड़ा संकट छापें ई-मेल
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चर्चा-संगोष्टी |   मीडिया डेस्क |  सोमवार , 12 जुलाई 2010
sanjay.patna.jpgमाखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल के जनसंचार विभाग के अध्यक्ष संजय द्विवेदी का कहना है कि माओवादी आतंकवाद से अब निर्णायक जंग लड़ने की जरूरत है क्योंकि यह देश के लोकतंत्र के सामने सबसे बड़ा संकट है।

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संगीत पर एक सार्थक संवादः संगीत से जीवित है संस्कृति की धारा छापें ई-मेल
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चर्चा-संगोष्टी |   संगीता बाजपेयी , मुंबई से |  मंगलवार , 22 जून 2010
cu.jpg'शास्त्रीय संगीत का इतना बड़ा समागम हो रहा है और युवा पीढ़ी नदारत नज़र आयें, तथा शास्त्रीय संगीत में रूचि रखने वाले बुजुर्ग ही इससे जुड़े हों' यह दर्द था सुप्रसिद्ध संगीतज्ञ इंद्रु आत्मा का जो उन्होंने मधु-मूर्छना के तीन दिवसीय कार्यक्रम में श्रोताओं के सामने प्रकट किये।

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अंडमान-निकोबार में रवींद्रनाथ टैगोर की 150वीं जन्मशती का आयोजन छापें ई-मेल
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चर्चा-संगोष्टी |   नरेश चन्द्र लाल, अंडमान निकोबार से |  बुधवार , 19 मई 2010
dsg1.jpegमहान कवि रवींद्रनाथ  टैगोर की 150वीं जन्मशती पर अंडमान-निकोबार द्वीप समूह की राजधानी  पोर्टब्लेयर में वर्ष भर चलने वाले भव्य समारोह का की शुरुआत हुई।

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अजय ब्रह्मात्मज के साथ ‘समय, समाज और सिनेमा’ पर सार्थक संवाद छापें ई-मेल
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चर्चा-संगोष्टी |   चण्डीदत्त शुक्ल, जयपुर से  |  शुक्रवार , 30 अप्रेल 2010
ajay2.jpgअजय ब्रह्मात्मज  कौन हैं? जाने-माने फ़िल्म पत्रकार, `ऐसे बनी लगान’, `समकालीन सिनेमा’ और `सिनेमा की सोच’ जैसी कई चर्चित किताबों के लेखक, महेश भट्ट की `जागी रातों के किस्से-हिन्दी  फ़िल्म उद्योग पर अंतरंग टिप्पणी’ सरीखी मशहूर किताब के संपादक या `चवन्नीचैप’ सरीखे महत्वपूर्ण ब्लॉग के मॉडरेटर!

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ठाकरे बंधुओं की राजनीति मराठियों के लिए घातक छापें ई-मेल
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चर्चा-संगोष्टी |   मीडिया डेस्क |  गुरुवार , 29 अप्रेल 2010
पिछले सप्ताह दिल्ली में आयोजित वृहन्न महाराष्ट्र मंडल के 63वें वार्षिक अधिवेशन के दौरान देश के जाने माने मराठियों ने कहा कि मुंबई में मराठी मानुष के नाम पर राजनेता जब भी कोई बवाल खड़ा करते हैं उसकी वजह से महाराष्ट्र के बाहर रहने वाले डेढ़ करोड़ से ज्यादा मराठियों को शर्मसार होना पड़ता है।

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डॉ. दुर्गाप्रसाद अग्रवाल का उदयपुर में ‘सृजन साक्षात्कार’ छापें ई-मेल
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चर्चा-संगोष्टी |   मीडिया डेस्क |  सोमवार , 12 अप्रेल 2010
pallav1117.jpgमनुष्य ताड़ पत्र से छापाखाने तक आया है। सब कुछ वैसा ही नहीं है जैसा हजार या पाँच  हजार बरस पहले था फिर मुद्रित शब्द से आगे डिजिटाइजेशन में  क्यों हो?

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प्रेम की भूतकथा पर जसम द्वारा गोष्ठी छापें ई-मेल
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चर्चा-संगोष्टी |   मीडिया डेस्क |  सोमवार , 12 अप्रेल 2010
pallav094.jpgउदयपुर। मुख्यधारा के साहित्य में ऐसी कृति नहीं है और अपने इसी विशिष्ट ढंग के कारण यह सर्वथा नया उपन्यास है। रहस्य रोमांच की कथा का आधार लेकर लिखे गए विभूति नारायण राय के सद्य प्रकाशित उपन्यास ‘प्रेम की भूतकथा’ पर आयोजित एक गोष्ठी में प्रो. नवल किशोर ने कहा कि प्रेम कथा के आकर्षण के अतिरिक्त उपन्यास में फ्रेंच क्रांति का संकेत साम्राज्यवाद- उपनिवेशवाद के सार्थक विरोध की भूमिका बनाता है।

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उम्मीद-ए-रोशनी कायम है लेकिन भाई गाँधी से छापें ई-मेल
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चर्चा-संगोष्टी |   रमा पाण्डेय |  गुरुवार , 25 मार्च 2010
महात्मा गाँधी से पूछा गया- क्या आप तमाम यंत्रों के ख़िलाफ़ हैं ? उन्होंने उत्तर दिया- मैं यंत्रों के ख़िलाफ़ नहीं हूँ मगर यंत्रों के उपयोग के पीछे जो प्रेरक कारण है वह श्रम की बचत नहीं है, बल्कि धन का लोभ है। इस लिए यंत्रों को मुझे परखना होगा।

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