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विदेशी लेखकों की भारतीय धर्मग्रंथों का अपमान करने की कुत्सित मानसिकता छापें ई-मेल
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पुस्तक चर्चा |   शंकर शरण |  गुरुवार , 09 सितम्बर 2010
शिकागो विश्वविद्यालय की प्रोफेसर वेंडी डोनीजर की लिखी पुस्तक 'द हिंदूज: ऐन अल्टरनेटिव हिस्ट्री' आजकल चर्चा में है। पुस्तक के चर्चा में आने की वजह कोई स्तरीय या शोधपरक लेखन नहीं, बल्कि हिंदू धर्मग्रंथों और आख्यानों के चुने हुए प्रसंगों की व्याख्या काम भाव की दृष्टि से किया जाना है।

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सामाजिक संदर्भों को उकेरते दो नाटक छापें ई-मेल
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पुस्तक चर्चा |   शमशेर अहमद खान |  सोमवार , 23 अगस्त 2010
paravez-ahmad.jpgशिल्पायन प्रकाशन द्वारा हाल ही में प्रकाशित वरिष्ठ पत्रकार परवेज़ अहमद के दो नाटकों का संग्रह ये धुआँ  कहाँ  से उठता है और छोटी ड्योढ़ीवालियाँ  वर्तमान सामाजिक संदर्भों को इस प्रकार रेखांकित करते हैं कि पाठक इन नाटकों के सारे घटनाक्रम अपने आस-पास घूमता महसूस करता है।

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आधी आबादी की प्रतिनिधि कविताएँ: धूप से रूठी चाँदनी छापें ई-मेल
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पुस्तक चर्चा |   प्रो. डॉ. पुष्पा दुबे  |  बुधवार , 07 जुलाई 2010
dhoop_se_roothi_chandni.jpgएक पुस्तक की दो समीक्षा, पढ़ने में भले ही अटपटा लगे लेकिन अमरीका में रह रही डॉ.सुधा ओम ढींगरा के कविता संग्रह ‘धूप से रूठी चाँदनी’ में बात ही ऐसी कुछ ऐसी है कि इसकी हर कविता और कविता का हर शब्द हर बार एक नई अनुभूति देता हैं।

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''धूप से रूठी चाँदनी'' : नैसर्गिक भाषा में नैसर्गिक चिंतन का उद्गार है - डॉ. आज़म छापें ई-मेल
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पुस्तक चर्चा |   मीडिया डेस्क |  गुरुवार , 01 जुलाई 2010
dhoop_se_roothi_chandni.jpgमेरा मानना है कि कविताओं की पुस्तकें तीन तरह के घर की तरह होती हैं,  एक जिनमें प्रवेश द्वार होता है जो निष्कासन द्वार भी सबित हो जाता है, अर्थात जाइए इधर -उधर देखिए वहीं खडे - ख़ड़े, फिर निकल आइए ।

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भारतीय जनमानस को समर्पित आरोग्यम छापें ई-मेल
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पुस्तक चर्चा |   शमशेर अहमद खान, दिल्ली से |  मंगलवार , 08 जून 2010

arogya-1.jpegस्वामी करम वीर जी महाराज द्वारा लिखित आरोग्यम पुस्तक का लोकार्पण डॉ। कर्ण सिंह जी के कर कमलों द्वारा दिल्ली के अति विशिष्ट गणमान्य उपस्थित जनों के बीच संपन्न हुआ।इस समारोह में न केवल चिकित्सा जगत के विश्व स्तर के एलोपैथिक के डॉ। बल्कि सभी चिकित्सा पद्धतियों के ख्याति प्राप्ति सम्मानित चिकित्सक के अलावा प्रशासक, मीडियाकर्मी,लेखक, अधिवक्ता आदि भी इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी रहे।

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अमेरिका और भारत में एक साथ हुआ धूप से रूठी चाँदनी का विमोचन छापें ई-मेल
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पुस्तक चर्चा |   अमरीका से कुबेरनी हनुमंथप्पा |  मंगलवार , 11 मई 2010
vimochan_in_america.jpgप्रतिष्ठित पत्रकार, कवयित्री, कहानीकार, उपन्यासकार डॉ। सुधा ओम ढींगरा का काव्य संग्रह '' धूप से रूठी चांदनी '' ( शिवना प्रकाशन) का विमोचन समारोह अमेरिका और भारत में एक साथ हुआ।

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दहशत की वो रात! छापें ई-मेल
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पुस्तक चर्चा |   मीडिया डेस्क |  सोमवार , 05 अप्रेल 2010
फातिमा तब महज 14 साल की थीं जब उनके पिता मुर्तजा अली भुट्टो को उनके छह साथियों के साथ मार दिया गया था।

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कश्मीरी पंडितों की पीड़ा पर पहली पुस्तक छापें ई-मेल
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पुस्तक चर्चा |   अरुण कुमार सिंह  |  मंगलवार , 30 मार्च 2010
आतंकवाद से ग्रस्त जम्मू-कश्मीर में 6 लाख से अधिक सैनिक तैनात हैं। इन सैनिकों को घाटी के उन्मादियों के साथ-साथ सीमा-पार पाकिस्तान से आने वाले जिहादियों का भी सामना करना पड़ता है।

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अयोध्या में राम मंदिर बनवाना चाहते थे नरसिंह राव छापें ई-मेल
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पुस्तक चर्चा |   मीडिया डेस्क |  मंगलवार , 19 जनवरी 2010
पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए काफी तैयारी की थी लेकिन 1996 में कांग्रेस के सत्ता खोने के कारण वह अपने अभियान को आगे नहीं बढ़ा सके।

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इतिहास के अंधेरे में गुम एक ‘महानायक’ की शौर्य गाथाएँ छापें ई-मेल
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पुस्तक चर्चा |   सुभाष गौड़ |  सोमवार , 28 सितम्बर 2009
mahanayak.jpgऐतिहासिक  शोध कार्य को रोचक उपन्यास  के रूप में प्रस्तुत करना एक दुष्कर और दुःसाध्य कार्य  है। उपन्यास ‘महानायक’ एक ऐसी ही कृति है जिसके लिए लेखक  ने उन सभी स्थानों  पर जाकर जोकि सुभाष बाबू  का कार्यक्षेत्र रहा, वृहद प्रामाणिक सामग्री एकत्र  की है।

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कविता की जातीयता छापें ई-मेल
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पुस्तक चर्चा |   प्रभाकर श्रोत्रिय |  बुधवार , 27 मई 2009
रामायण महाभारत तो सांस्कृतिक अवबोधन के काव्य हैं ही, वेद भी एक अर्थ में महान काव्य है। इसलिए भारतीयता का संधान भारतीय काव्य में करना एक सार्थक कार्य है।

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