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| जियो तो ऐसे जियो | शिवानी जोशी | बुधवार , 20 फ़रवरी 2008 | |||
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इस देश के घर-घर और मंदिरों में जिसके शब्द बरसों से गूंज रहे हैं, दुनिया के किसी भी कोने में बसे किसी भी सनातनी हिंदू परिवार में ऐसा व्यक्ति खोजना मुश्किल है जिसके ह्रदय-पटल पर बचपन के संस्कारों में उसके लिखे शब्दों की छाप न पड़ी हो। उनके शब्द उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत के हर घर और मंदिर मे पूरी श्रध्दा और भक्ति के साथ गाए जाते हैं। बच्चे से लेकर युवाओं को और कुछ याद रहे या न रहे इसके बोल इतने सहज, सरल और भावपूर्ण है कि एक दो बार सुनने मात्र से इसकी हर एक पंक्ति दिल और दिमाग में रच-बस जाती है। हम बात कर रहे हैं देश और दुनियाभर के करोड़ों हिन्दुओं के रग-रग में बसी ओम जय जगदीश की आरती की। हजारों साल पूर्व हुए हमारे ज्ञात-अज्ञात ऋषियों ने परमात्मा की प्रार्थना के लिए जो भी श्लोक और भक्ति गीत रचे, ओम जय जगदीश की आरती की भक्ति रस धारा ने उन सभी को अपने अंदर समाहित सा कर लिया है। यह एक आरती संस्कृत के हजारों श्लोकों, स्तोत्रों और मंत्रों का निचोड़ है। लेकिन इस अमर भक्ति-गीत और आरती के रचयिता पं. श्रध्दाराम शर्मा के बारे में कोई नहीं जानता और न किसी ने उनके बारे में जानने की कोशिश की। हमारे हजारों पाठकों ने हमारा ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि हम ओम जय जगदीश की आरती के लेखक के बारे में कुछ बताएं। प्रस्तुत है इस अमर रचनाकार का जीवन परिचय।
ओम जय जगदीश की आरती जैसे भावपूर्ण गीत के रचयिता थे पं. श्रध्दाराम शर्मा। प. श्रध्दाराम शर्मा का जन्म 1837 में पंजाब के लुधियाना के पास फुल्लौर में हुआ था। उनके पिता जयदयालु खुद एक अच्छे ज्योतिषी थे। उन्होंने अपने बेटे का भविष्य पढ़ लिया था और भविष्यवाणी की थी कि यह एक अद्भुत बालक होगा। बालक श्रध्दाराम को बचपन से ही धार्मिक संस्कार तो विरासत में ही मिले थे। उन्होंने बचपन में सात साल की उम्र तक गुरुमुखी में पढाई की। दस साल की उम्र में संस्कृत, हिन्दी, पर्शियन, ज्योतिष, और संस्कृत की पढाई शुरु की और कुछ ही वर्षो में वे इन सभी विषयों के निष्णात हो गए। हिन्दी के जाने माने लेखक और साहित्यकार पं. रामचंद्र शुक्ल ने पं. श्रध्दाराम शर्मा और भारतेंदु हरिश्चंद्र को हिन्दी के पहले दो लेखकों में माना है। पं.श्रध्दाराम शर्मा हिन्दी के ही नहीं बल्कि पंजाबी के भी श्रेष्ठ साहित्यकारों में थे, लेकिन उनका मानना था कि हिन्दी के माध्यम इस देश के ज्यादा से ज्यादा लोगों तक अपनी बात पहुँचाई जा सकती है। पं. श्रध्दाराम का निधन 24 जून 1881 को लाहौर में हुआ।
ओम जय जगदीश, स्वामी जय जगदीश हरे भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे
जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का
मात पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी
तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतर्यामी
तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति
दीनबंधु दुःखहर्ता, तुम रक्षक मेरे.
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा ओम जय जगदीश, स्वामी जय जगदीश हरे
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टिप्पणियाँ (31)
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शिवानी जी
आपने पंडित जी के बारे मे बता के बहुत अच्छा किया है मुझे तो ये सब मालूम नही था आपने लिखा भी बहुत अच्छा है आप का धन्यवाद रचना 1 अवांच्छित दर्ज करें
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मार्च 13, 2008
मत: +14
शिवानी जी,
आपने पं. श्रध्दाराम शर्मा जी के बारे में एक बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी देकर पाठकों का बड़ा उपकार किया है. ऐसी महान विभूति के बारे में जानकर श्रद्धा से उनके प्रति मस्तक झुक गया है. ऐसी मत्वपूर्ण जानकारी के लिए आप भी बधाई की पात्र हैं. 2 अवांच्छित दर्ज करें
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नवम्बर 24, 2008
मत: +8
शिवानी जी
आपने पंडित जी के बारे मे बता के बहुत अच्छा किया है, मालूम नही था आपने लिखा भी बहुत अच्छा है, आपका धन्यवाद 3 अवांच्छित दर्ज करें
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दिसम्बर 05, 2008
मत: +3
आचार्य संजीव 'सलिल', संपादक दिव्या नर्मदा
संजिव्सलिल.ब्लागस्पाट.कॉम / सलिल.संजीव@जीमेल.कॉम आत्मीय! वंदे-मातरम. परिचय श्रद्धाराम का, जन-गण को उपहार. रचना सबको याद है, बिसरा रचनाकार. होता है अभिव्यक्त ख़ुद परमब्रम्ह हर बार. शब्द ब्रम्ह जब कलम से लेता है आकार. कवि है केवल माध्यम, सृजन नहीं व्यापार. मान्य न भारत में रहा, प्रतिलिपि का अधिकार. श्रुति-स्मृति की प्रथा की, ऋषियों ने स्वीकार. सार्थक स्मृति में रहे, जो बिसरे बेकार. किया शिवानी ने पुनः, सच का आविष्कार. साधुवाद देता 'सलिल', बार-बार आभार. 4 अवांच्छित दर्ज करें
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दिसम्बर 19, 2008
मत: +14
मेरा नाम नरिंदर कुमार है मैं स्पेन मैं रह रहा हूँ मैं पुंजाब के शहर नवांशहर गावं जाडला टाऊन का हूँ मुझे पंडित शरदा राम शर्मा जी के बारे मैं जान कर बहुत खुशी हुई एक महान इंसान के बारे मैं आप लोगों नें हमें बताया मेरे ह्केअल मैं बहुत ही कम लोग जानते होंगे की ॐ जय जगदीश आरती किसने लिखी आप का बहुत बहुत धनेअबाद के आप ने इस के बारे मैं हमें बताया
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दिसम्बर 31, 2008
मत: +3
पंडित श्रद्धाराम शर्मा से सम्बंधित लेख है तो सारगर्भित और पठनीय, लेकिन इस में कई अशुद्धियाँ हैं. पहली अशुद्धि तो पंडित जी के जन्मस्थान के नाम के बारे में है. यह स्थान फुल्लौरी नहीं, फुल्लौर है, जहाँ के निवासी होने के नाते पंडित जी ने अपने जातिनाम के स्थान पर स्थानवाची नाम फुल्लौरी लिखा है और वे हिन्दी साहित्य के इतिहास में श्रद्धाराम फुल्लौरी के नाम से जाने जाते हैं. दूसरी अशुद्धि अधिक गंभीर है. आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने अपने इतिहास में कहीं नहीं लिखा कि पंडित श्रद्धाराम फुल्लौरी हिन्दी के पहले लेखक या पहले गद्यकार थे. शुक्ल जी ने केवल यह लिखा है कि "जिस दिन उनका (पंडित श्रद्धाराम का) देहांत हुआ, उस दिन उनके मुहँ से सहसा निकला कि भारत में भाषा के दो लेखक हैं - एक काशी में, दूसरा पंजाब में. परन्तु आज एक ही रह जायेगा." ज़ाहिर है कि शुक्ल जी ने पंडित जी के शब्दों को उद्धृत किया है, न कि स्वयं यह लिखा है. और पंडित जी ने भी ख़ुद को हिन्दी का पहला लेखक नहीं कहा. वर्षों पहले मैं ने बीबीसी के कार्यक्रम हमसे पूछिए में आरती के रचयिता के बारे में एक श्रोता के प्रश्न का उत्तर देते हुए काफ़ी विस्तार से बताया था.
गौतम सचदेव 6 अवांच्छित दर्ज करें
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जनवरी 01, 2009
मत: +2
Shivani you have done great service by bringing this fact to our knowledge about the writer of Om Jai Jagdeesh...This aarti has become almost eternal truth in all hindu families.Thanks and may god be with you.
7 अवांच्छित दर्ज करें
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जनवरी 08, 2009
मत: +2
bhut hi bhumuly jankari
8 अवांच्छित दर्ज करें
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जनवरी 13, 2009
मत: +1 पंडित श्रद्धाराम शर्मा पर आपका लेख पढ़ कर बहुत अच्छा लगा . 'ॐ जय जगदीश हरे ' आरती के विषय में भी जान कर प्रसन्नता हुई . महेंद्र वर्मा यॉर्क, यू . के. 9 अवांच्छित दर्ज करें
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अप्रेल 23, 2009
मत: +2
well done great service by bringing about the writer of Om Jai Jagdeesh. in Thanks and may god be with you.
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जुलाई 03, 2009
मत: +0
पंडितजी के बारे में विस्तृत जानकारी देकर आपने कृतार्थ किया. पंडित श्रद्धाराम जी के श्री चरणों में सादर वंदन. कृपया ये भी बताने की अनुकम्पा करें ,की इस आरती की धुन किसने बनाई है,क्योंकी ये एक ऐसी शाश्वत धुन बन पडी है जिसे कोई भी गा सकता है,चाहे उसे संगीत का ज्ञान हो या ना हो.
11 अवांच्छित दर्ज करें
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जुलाई 05, 2009
मत: +5
pandit जी के बारे में जान कर बहुत ही अच्छा लगा............. jinhone कालजयी रचना इस समाज को दी है उमके चरणों में मेरा शीश jhuka कर namr वंदन है .................. ati uttam जानकारी ............
12 अवांच्छित दर्ज करें
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जुलाई 26, 2009
मत: +5
रचना ऐसे ही प्रसिद्ध नहीं हो जाती है किसी रचना के प्रसिद्धि के पीछे रचनाकार का संस्कार विद्युत, चुम्बक,प्रेरक तथा उत्प्रेरक की तरह कार्य करता है और यह बतलाता है की रचनाकार का इसके पीछे कितना समर्पण, तप, तथा साधना लगा हुआ है.
आपको इनके बारे में जानकारी देने के लिए कोटि कोटि धन्यवाद, भगवान् जगदीश की आप पर कृपा बनी रहे , 13 अवांच्छित दर्ज करें
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अगस्त 10, 2009
मत: +0
pandit shri shardha Ram ji ki bare mai jankar bahut achha laga. Aaj se pahale ye maloom nahi tha ki Aarti kai rachiyata aap hai, Shivani ji aap ko sadhu vad is jankari dane kai liy.
M.S. Arora 14 अवांच्छित दर्ज करें
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अगस्त 11, 2009
मत: +0
aap ne jo ye jankari di hai uske liye bahut bahut dhanyawad. Is internet ke yug ka ese hi sadupyog karke logon ko jankari dete raho.
Dhanyawad Aditya 15 अवांच्छित दर्ज करें
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अक्टूबर 05, 2009
मत: +0
OM JAY JAGDISH HARE,AARTI KE JANKARI WRITER KA NAM AAP NE BATYA THANK'S
16 अवांच्छित दर्ज करें
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नवम्बर 18, 2009
मत: +4
vkse t; txnh'k ds jfp;rk ds ckjs esa tkudjh izkIr gqbZ jpuk ds ys[k ds ckjs ds vufHkx jgk !bl ds fy;s dksfV'k /kU;okn!
vkselk/kuk, Hkksiky 17 अवांच्छित दर्ज करें
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जनवरी 05, 2010
मत: +1
Sir,
Pandit Ji ke bare me jo jankari apne di waha bahute hi umda hai. dEVILAL Chouhan 18 अवांच्छित दर्ज करें
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जनवरी 11, 2010
मत: +0
aapne panditji ke lekh main aarti ke rachaiyta ki jankari dene ke liye dhanyabad
19 अवांच्छित दर्ज करें
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मार्च 06, 2010
मत: +0
पण्डित जी के बारे में आपने जो जानकारी दी वह हम में से बहुत ही कम लोगों को मालूम थी। इस जानकारी को बाँटने के लिये बहुत-बहुत धन्यवाद।
20 अवांच्छित दर्ज करें
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अप्रेल 12, 2010
मत: +0
om jai jagdish ke rachnakar ke bare me jankar bahut hi khushi hui, hume esase pahle nahi pata tha ki es sunder arti ka rachnakar kaun hai, after all thank a lot.
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मई 04, 2010
मत: +0
एक स्त्री की मौन साधना से रचा गया Brahmasutra
I find following facts about the above articles from archives It was not Brahmasutra but its commentary by Pandit Vachaspati Mishra. Brahmasutra, Upanishads, Mahabharat and 18 Purans were all written by Maharshi VedaVyas. 2. There is no mention of the neighbour, the lady in this text, in our mythology. Pandit Vachaspati noticed the existence of his wife after so-many years, in his old age, was impressed by her selfless services, and named his commentary (Tika- in Hindi & Sanskrit) after Bhamti. 3. Also, there is no mention of Bhamti’s father visiting her. 4. Adi Shankaracharya, so far is the only one who has written commentaries on Brahmasutra, Upanishads and Gita (Prasthan Trayi). The belief is that no one can ever complete commentaries on these three in one life span (as they are so complex and lengthy). I shall be grateful if you kindly inform us the facts about the history. regds 22 अवांच्छित दर्ज करें
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सितम्बर 16, 2010
मत: +0
आपका लेख बहुत बहुत उत्तम है। यह जानकारी हमें अतीत से जोड़ने के साथ कई नई बातें भी बताती है, आज ही लेख को पढ़ा यह लिंक किसी मित्र ने बताया था, एक विनती है आपसे कि पंडित जी का नाम सही लिख दीजिए यह पं. श्रध्दाराम नहीं बल्कि पं. श्रद्धाराम है. इस त्रुटि की ओर ध्यान दिलाने के लिए क्षमायाचना सहित
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दिसम्बर 16, 2010
मत: +1
thanks for good knowalge
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जनवरी 24, 2011
मत: +0
संदीपन कुमार आर्य शास्त्री
19 शताब्दी में ब्रिटिश पंजाब के लाहौर में अनेक समाज सुधारक, क्रातिकारी ,देशभक्त हुएँ हैं जिस काल में पंडित श्रधा राम जी हुए तब वहां आर्यसमाज का प्रचार जोरों पर था उस धार्मिक और सामाजिक आन्दोलन ने अंग्रेंजों के खिलाफ अनेक क्रांतिकारियों को जन्म दिया था ऐसे समय में पंडित जी ने ॐ जय जगदीश प्रभु भक्तिमय प्रारथना लिखकर तथा उसके रागमयी बनाकर ,गाकर भारतीय जनमानस में सदा के लिए अमर हो गए वस्तुत ; इसके रचयिता के बारे में कोइ भी नहीं जानता है शिवानी जी आपने यह जानकारी देकर बहुत उपकार किया है एतदर्थ आपको बहुश; धन्यवाद स्वागतम अंत में नमस्ते 25 अवांच्छित दर्ज करें
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मई 15, 2011
मत: +1
मै बचपन से हमेशा सोचा करता था कि इतनी लोकप्रिय और इतनी प्रचलित आरती " ओम जय जगदीश हरे " के रचयिता कौन हैं? मेरी इतनी पुरानी जिज्ञासा को मिटाने के लिए और ऐसे महापुरुष के बारे में जानकारी देने के लिए मै हमेशा आपका आभारी रहूँगा, आपको शत शत नमन I
26 अवांच्छित दर्ज करें
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सितम्बर 26, 2011
मत: +0
om jai jagdish aarti gate mere akho se ashu nikalte he is aarti me bhagwan ki itni mahima gai he
thanks is informetion ke liye 27 अवांच्छित दर्ज करें
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नवम्बर 05, 2011
मत: +0
pandit shraddharam sharma ko shraddhapurn naman karte huye es bhavpurna parichay hetu shivaniji ko kotishah sadhuvad......
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फ़रवरी 26, 2012
मत: +0
Thanks Sir is jankari ke lya
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अप्रेल 07, 2012
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