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बेकारअति उत्तम 
  
ब्लॉग समीक्षा |   रंजना [रंजू ]भाटिया ] |  मंगलवार , 30 सितम्बर 2008

हिन्दी भाषा में अनेक ब्लॉग लिखे जा रहे हैं। सब के विषय अलग-अलग हैं ,और इन पर लिखने वाले भी अलग राज्य अलग प्रांत से हैं। आम तौर पर यह माना जाता है कि दक्षिण भारत में रहने वाले लोग या तो अपनी भाषा समझते हैं या फ़िर वे अंग्रेजी भाषा से परिचित होते हैं , पर यह भ्रम तोड़ता है केरला फार्म ब्लॉग यह ब्लॉग दक्षिण भारत में रहने वाले एक पूर्व सैनिक द्वारा लिखा जा रहा है। सुन कर अच्छा लगा न ! .और लगे भी क्यों नही, आख़िर तो हम सब भारतीय हैं। और हिन्दी तो हमारी सबकी प्यारी भाषा है।  इसको लिखने वाले का नाम "चन्द्रशेखरन नायर है " जो केरल में तिरुवनन्तपुरम जिले के रहने वाले हैं। यह 59 साल (उम्र) के पूर्व सैनिक हैं । यह एस.एस.एल.सी तक पढ़े लिखे हैं।

वे हिन्दी पढ़ना तो अच्छी तरह से जानते हैं , लेकिन हिन्दी भाषा बहुत अच्छी तरह से नही लिख पाते । इससे उनका हिन्दी में पढने लिखने का उत्साह कम नहीं हुआ है। वे निरन्तर हिन्दी भाषा में हिन्दी में लिखने की कोशिश कर रहे हैं ।  इन्होने 2005 जून से अंग्रेजी में ब्लॉग लिखने की शुरुआत की,  फ़िर 2007 फरवरी में  हिन्दी ब्लॉग पर लिखना शुरू किया। एक किसान होने के साथ साथ वे इंटरनेट पर भी काम करना जानते हैं। यह चाहते हैं कि किसानों की जो भी समस्या है वह आम लोगों तक पहुंचे । कुछ नई जानकारी वह इस के जरिये सब तक पहुँचाना चाहते हैं।  केरल में मुख्य रूप से रबड़ की खेती होती है और उससे संबंधित उस के आँकडे (Statistics) के विषय पर जानकारी अपने ब्लॉग पर देते हैं।

हिन्दी विषय को अच्छे से समझने के लिए वे अधिक से अधिक हिन्दी ब्लॉग पढ़ते हैं। उत्तर भारतीय भाषीय लोगों को जानना और उनसे बातचीत करने का ब्लॉग एक अच्छा माध्यम है। इनके ब्लॉग को बहुत से लोग पढ़ते हैं और जानकारी भी हासिल करते हैं। तभी तो इसको पढने वाले इस पर अपनी यह टिप्पणी देने से ख़ुद को रोक नही पाते हैं --""स्वागतम चन्द्रशेखरन जी - दक्षिण भारत से आपका ये बहुभाषी ब्लॉग एक मील का पत्थर है.""।
वे चाहते हैं कि जो लोग इनका ब्लॉग पढ़ते हैं वे खुले दिल से उसको पढ़े और इनकी हिन्दी की लिखावट में सुधार के लिए अपनी राय जरुर दें ।

जब इस तरह से कुछ सार्थक प्रयास होते हैं तो अपनी भाषा को आगे बढाने की दिशा में निश्चित रूप से यह बहुत ही अच्छा कदम है। उस वक्त यह प्रयास और भी प्रशंसनीय हो जाता है जब हिन्दी भाषा को जानने वाले इसका प्रयोग करने में अपनी शान कम समझते हो और भाषा का झगडा बिना बात के होता हो।

बेशक आप खेती-बाडी में विशेष रूचि न रखते हो और इस में पढने पर कई गलतियाँ भी पाते हों, फ़िर भी आप इस ब्लॉग को लिखने वाले का चन्द्रशेखरन नायर का उत्साह  बढ़ाएँ और जो कमी, या गल्ती आपको दिखती हो, उसको ठीक करने में मदद करें ताकि अधिक से अधिक लोग इस तरह हिन्दी ब्लॉग लिखने की दिशा में प्रेरित हों और अधिक उत्साह से अपनी भाषा में बात लिखी जा सके। आप इस तरह से भी हिन्दी भाषा के विकास में अपना योगदान देसकते हैं।

http://keralafarmeronline.com/

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टिप्पणियाँ (1)add comment
एस. चन्द्रशेखरन नायर: ...
श्रीमति रंजना भाटिया जी ने मेरा और मेरा ब्लोगिंग के विषय पर ऐसे एक लेख लिखकर मेरा नाम रोषण कर दी। ब्लोग में हम एक दूसरे को जानते और पसन्त करते हैं उनकी लिखी गई बातों से। केरल जो हिन्दुस्थान के भाग हैं और मैं उस महान देश की राष्ट्र भाषा को आदर के साथ इस्तेमाल करने का कोशिश कर रहा हूँ। जैसे रंजना जी ने कही उस में यह भी जोड दें "मेरा उम्र को मत देखो, लिखने में जो गलतियाँ हुई उसे देखो और सुतारने में मेरा मदद करें"
धन्यवाद
1

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सितम्बर 30, 2008
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