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हिन्दी की विकास यात्रा पर एक सार्थक आयोजन
  
विशेष |   मीडिया डेस्क  |  शनिवार , 07 मई 2011

नई दिल्ली के हिन्दी भवन में हिन्दी साहित्य निकेतन की 50 वर्ष की स्वर्णिम यात्रा के साक्षी रूप में देश के विभिन्न क्षेत्रों से 400 सहित्यकार और ब्लागर उपस्थित हुए। कार्यक्रम का उद्घाटन उत्तराखंड राज्य के मुख्यमंत्री श्री रमेश पोख्रियाल निशंक जी ने किया। निशंक जी जैसे सहित्यकार मुख्य मंत्री, ओजस्वी वक्ता, सहृदय कवि को अपने बीच पाकर उपस्थित सभी साहित्यकार परम आनंदित थे। अपने कवित्‍वमय उद़बोधन में निशंक जी ने हिन्‍दी की सेवा में संलग्‍न हिन्‍दी साहित्‍य निकेतन और उसके सचिव एवं साहित्‍यकार डॉ. गिरिराजशरण अग्रवाल एवं अध्‍यक्षा डॉ. मीना अग्रवाल एवं उनके परिवार को बधाई दी और कामना की कि हिन्‍दी साहित्‍य निकेतन ने शोध के जो प्रकल्‍प लिए हैं, उनमें उसे सफलता प्राप्‍त हो।

केंद्रीय हिन्‍दी संस्‍थान के उपाध्‍यक्ष प्रो. अशोक चक्रधर ने कहा कि पिछले 50 वर्ष की यात्रा में से 35  वर्ष का साक्षी मैं भी हूँ। मैं डॉ. गिरिराजशरण अग्रवाल और डॉ. मीना अग्रवाल के समर्पण को देखकर चकित रह जाता हूँ। लोग कहते हैं कि लड़कियाँ पराया धन होती हैं लेकिन गीतिका और अनुभूति की लगन को देखकर मैं इस कथन को असत्‍य होता देखता हूँ। जिस समर्पण से ये दोनों हिन्‍दी साहित्‍य निकेतन की सेवा में लगी हैं, वह अनुकरणीय है।

प्रसिद्ध साहित्‍यकार प्रो. रामदरश मिश्र ने कहा कि डॉ. गिरिराजशरण अग्रवाल और डॉ. मीना अग्रवाल के साहित्‍य को मैंने पढा है। वे दानों जितने कुशल व्‍यवस्‍थापक हैं, उतने ही बढे साहित्‍यकार भी हैं। इसी के साथ शोध संदर्भ जैसी विशाल योजना को कार्यरूप देना उनकी दूरद़ष्टि का परिचायक है।

प्रसिद्ध समीक्षक और लेखक डॉ. प्रभाकर श्रोत्रिय शोध संदर्भ जैसी योजना और हिन्‍दी साहित्‍य निकेतन की विकास यात्रा से गद`गद थे। उन्होंने कहा कि देश और विदेश के ब्‍लागरों को एक मंच पर लाने के श्री रवीन्‍द्र प्रभात और श्री अविनाश वाचस्‍पति के प्रयास को गति देने में इस संस्‍थान की सक्रियता को समर्थन देना हम सबका दायित्‍व है।

परिकल्पना डॉट कॉम ब्लॉगोत्सव-२०१० के अंतर्गत हिंदी ब्लॉगिंग में प्रत्‍येक विधा और श्रेणी से एक-एक श्रेष्ठ ब्लॉगर का चयन करते हुए इक्‍यावन हिंदी ब्‍लॉगरों का; और नुक्कड़ डॉट कॉम हिंदी ब्लॉगिंग में अपने बल पर विशेषज्ञता हासिल करने और हिंदी ब्‍लॉगिंग के विकास में महती योगदान के फलस्‍वरूप 13 ब्लॉग प्रतिभाओं को भी पहचान कर सम्मानित किया गया। हिंदी ब्‍लॉगिंग के उन्‍नयन के लिए यह एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व अवसर था।

इस कार्यक्रम की एक बड़ी उपलब्धि थी श्री रवीन्‍द्र प्रभात और श्री अविनाश वाचस्‍पति द्वारा संपादित और हिन्‍दी साहित्‍य निकेतन द्वारा प्रकाशित पुस्‍तक 'हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग - अभिव्‍यक्ति की नई क्रांति' का लोकार्पण। हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग पर प्रकाशित इस पुस्‍तक ने वास्‍तव में एक नई क्रांति की है। इसी के साथ श्री रवीन्‍द्र प्रभात के उपन्‍यास ' ताकि बचा रहे लोकतंत्र', श्रीमती रश्मिप्रभा के संपादन में प्रकाशित पत्रिका 'वटवृक्ष' तथा श्री रमेश पोखरियाल निशक द्वारा लिखित पुस्तक 'सफलता के अचूक मंत्र' का लोकार्पण पूरी गरिमा के साथ संपन्न हुआ।

हिन्‍दी साहित्‍य निकेतन की विकास यात्रा की सचित्र प्रस्तुति में गीतिका गोयल और अनुभूति का तक्नीकि ज्ञान चकित करने वाला था। हिंदी के मुख्य ब्लॉग विश्लेषक साहित्यकार लखनऊ निवासी रवीन्द्र प्रभात और नुक्कड़ डॉट कॉम के मॉडरेटर -व्यंग्यकार दिल्ली निवासी अविनाश वाचस्पति के सहयोग से इस आयोजन का जीवंत प्रसारण इंटरनेट के माध्‍यम से नुक्‍कड़ डॉट कॉम, http://bambuser।com/channel/girishmukul/broadcast/1598881 बमबजर, फेसबुक, ट्विटर, गूगल बज इत्‍यादि लोकप्रिय साइटों पर किया गया।

 उल्लेखनीय है कि हिन्दी सहित्य निकेतन की नींव प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. गिरिराजशरण अग्रवाल ने सन् 1961 में वसंत पंचमी के शुभ दिवस पर रखी थी। 1968 में प्रसिद्ध हास्य कवि पद्मश्री काका हाथरसी की भतीजी डा। मीना अग्रवाल से विवाह के पश्चात से अग्रवाल दम्पती मिलकर इस संस्थान को अपने श्रम से सींचते रहे। ‘हिन्दी साहित्य निकेतन’ ने 300 से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन किया है एवं हिन्दी शोध की दिशा में एक नया आयाम स्थापित किया है। ‘शोध सन्दर्भ’ इसका एक ऐसा प्रकाशन है, जो हर शिक्षण संस्थान में होना अनिवार्य है। हिन्दी साहित्य निकेतन द्वारा प्रकाशित त्रैमासिक पत्रिका शोध-दिशा देश-विदेश के पाठकों के बीच उत्तम रचना-चुनाव एवं सुन्दर प्रस्तुतिकरण के लिये जानी जाती है।

 दूसरे सत्र में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के छात्रों ने कालजयी साहित्यकार रविन्द्रनाथ टैगोर की बंगला नाटिका का हिंदी रूपांतरण लावणी ग्रुप प्रस्तुत कर सभागार में उपस्थित दर्शकों को मन्त्र मुग्ध कर दिया । इस अवसर पर हिंदी साहित्य निकेतन की ५० वर्षों की यात्रा को आयामित कराती पावर पोईन्ट प्रस्तुति भी हुई । कार्यक्रम का संचालन रवीन्द्र प्रभात और गीतिका गोयल ने किया। इस अभियान और आयोजन को सफल बनाने में डायमंड बुक्‍स का महत्‍वपूर्ण सहयोग प्राप्‍त हुआ।

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टिप्पणियाँ (1)add comment
गुफरानुल्लाह मारूफ़: ...
सब से पहले तो में आप सबकार्यकर्ताओं को इस शुभ कार्य की मुबारकबाद देता हूँ
बाद में मैं भी आप का सदस्य बनना चाहता हूँ
मैं नंगरहार विश्‍‍व विद्यलय में हिंदी अध्यापन कार्य कर गर्व का अनुभव कर र हा हूँ
जब भी नेट में हिंदी के लिए की हुई सेवा पर नज़र लग जाती है तो मैं अपने भाग्य को सराहता हूँ
कि चलो मारूफ़ अभी हमसफ़र बाकी है।
अंत में एक ग़ज़ल जो मेरी अपनी रची है
संशोधन के लिए पेश करता हूँ......




न जाने किस ने कैसे एक ऐसा काम की
जीना तो है मुश्‍किल मौत भी हराम की
हम सोचते कहाँ के और जा पड़े कहाँ
किस बाधक ने हमारा ऐसा अंजाम की
हम आशिके पाक दिल व बावफा थे यारो
इस पाक दिली के प्यार ने हमें बदनाम की
साकी से मैंने मांगा जीने का आख़री जाम
साकी ने वही जाम किसी ग़ैर के नाम की
मारूफ़ मैं करुँ क्या कैसे गुज़ारुँ जीवन
एक शायरी थी उसने भी पूरा कलाम की
hamesha shad o abad rahe hindi aur hindi khidmatgar
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मई 24, 2011
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